कोरोना के बाद अब जानवरों में लम्पी का खौफ

  • Devendra
  • 11/08/2022
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बिजयनगर। कोरोना और मंकीपॉक्स के बाद अब राज्य में ‘लम्पी’ ने कोहराम मचा दिया है। पशुओं को निशाना बनाने वाले इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। लम्पी एक संक्रामक स्किन की बीमारी है जिससे अब तक कई पशुओं की मौत हो चुकी है और कई इस संक्रामक बीमारी की चपेट में हैं। इनमें ज्यादातर गायें हैं।
स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. मोहम्मद रफीक खान ने बताया कि बिजयनगर तहसील क्षेत्र में अब तक 89 मामले पाए गए हैं जिनमें से 7 रिकवर हो चुके हैं और 5 गायों की मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी कमजोर इम्युनिटी वाली गायों पर ज्यादा हावी हो रही है। इसलिए किसान और पशुपालकों को ज्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि उनके यहां लम्पी बीमारी के लक्षण गायों में दिखाई दे तो वे पशु चिकित्सालय बिजयनगर पर सम्पर्क कर उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
क्या है लम्पी वायरस
लम्पी वायरस पशुओं में फैलने वाला एक विषाणु जनित गांठदार त्वचा रोग है। इस बीमारी से ग्रसित जानवरों के शरीर पर दर्जनों की संख्या में गांठें उभर आती हैं। साथ ही तेज बुखार, मुंह से पानी टपकना शुरू हो जाता है। इससे पशुओं को बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होती है। उसे चारा खाने और पानी पीने में भी परेशानी होती है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो मच्छर, मक्खी और जू आदि के काटने या सीधा संपर्क में आने से फैलती है। कम प्रतिरोधक क्षमता वाली गायें शीघ्र ही इस वायरस की शिकार हो जाती है। बाद में यह वायरस एक से दूसरे पशुओं में फैल जाता है।
रोकथाम व उपचार
1. फार्म और परिसर में सख्त जैव सुरक्षा उपायों को अपनाएं
2. नए जानवरों को अलग रखें और त्वचा की गांठों और घावों की जांच करवाएं।
3. प्रभावित क्षेत्र से जानवरों की आवाजाही से परहेज करें।
4. प्रभावित जानवर को चारा, पानी और उपचार के साथ झुंड से अलग रखें, ऐसे जानवर को चरने वाले क्षेत्र में नहीं जाने दें।
5. उचित कीटनाशकों का उपयोग करके मच्छरों और मक्खियों के काटने पर नियंत्रण। इसी तरह नियमित रूप से कीट/मच्छर विकर्षक दवा का उपयोग करें, जिससे कीट/मच्छर संचरण का जोखिम कम हो जाएगा।
6. इसमें फार्म व उसके आसपास के स्थानों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
7. त्वचा में अन्य संक्रमणों के फैलाव को रोकने के लिए उपचार गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जा सकता है। पशुपालक संक्रमित घाव को एक प्रतिशत पोटेशियम परमेगनेट (लाल दवा) अथवा फिटकरी के घोल से साफ कर एंटीसेप्टिक मलहम लगाकर संक्रमण को नियंत्रित कर सकते हैं।
एसडीएम मीणा व तहसीलदार यादव ने किया बाड़ी माता गौशाला का निरीक्षण
स्थानीय श्री बाड़ी माता गौशाला का मसूदा उपखंड अधिकारी एसडीएम संजू मीणा, तहसीलदार सत्यवीर यादव ने औचक निरीक्षण कर गोवंश में इन दिनों चल रही लम्पी स्किन डिजीज बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। एसडीएम मीणा ने केमिकल का छिड़काव कर रहे गोपालक की व्यवस्था देखी। उन्होंने व्यवस्थाओं को संतोषप्रद बताते हुए कहा कि यदि कोई गोवंश संक्रमित पाया जाता है तो उसे अन्य अलग कर उपचार करते हुए आइसोलेट रखने की हिदायत दी। मंदिर ट्रस्टी कृष्णा टाक ने बताया कि गौशाला में सभी गोवंश स्वस्थ है। गॉट टॉप्स का टीका मंगवाकर चिकित्सकीय स्टॉफ द्वारा वैक्सीनेशन किया गया।

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