विद्या व धन के लिए शुभ है बसंत पंचमी

  • Devendra
  • 18/01/2018
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बिजयनगर। माघ शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि को बसंत पंचमी कहा जाता है। बसंत पंचमी का त्यौहार हिन्दू धर्म में एक विशेष महत्व रखता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ की जाती है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण कर पूजा अर्चना करती हैं। पूरे साल को जिन छ: मौसमों में बांटा गया है, उनमें बसंत लोगों का मनचाहा मौसम है। इसे ऋषि पंचमी भी कहते हैं।

कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारम्भिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे। तब उन्होंने भगवान विष्णु से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छिड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था।

वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा।

सरस्वती को बागीश्रृरी, भगवती, शारदा, वीणा वादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी हैं। बसंत पंचमी के दिन इनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता हैं।

पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधाना की जाएगी इस कारण हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती हैं।

पर्व का महत्व
ऋतु में मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास भरने लगते हैं। यू तों माघ का पूरा मास ही उल्लास देने वाला होता है पर बसंत पंचमी का पर्व हमारे लिए कुछ खास महत्व रखता है। प्राचीनकाल में इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्म दिवस माना जाता है।

इसलिए इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे ज्ञानवान, विद्यावान होने की कामना की जाती है। वहीं कलाकारों में इस दिन का विशेष महत्व है। कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार, नृत्यकार अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते हैं।

पूजन की विधि
प्रात: उठकर बेसनयुक्त तेल का शरीर पर उबटन करके स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर मां शारदे की पूजा करना चाहिए। इसके साथ ही केसरयुक्त मीठे चावल अवश्य घर में बनाकर सेवन करना चाहिए।

रेणु शर्मा, प्रधानाध्यापिका, सुभाष विद्या निकेतन, बिजयनगर

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