विद्यार्थी ज्यादा, सुविधाएं शून्य

  • Devendra
  • 24/11/2022
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शहर में स्थित अस्थाई सरकारी कॉलेज भवन में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में यहां पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि पर्याप्त पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं है तो वहीं छात्राओं के लिए अलग से शौचालय का अभाव है। टकटकी भामाशाहों व स्वयंसेवी संस्थाओं पर लगी है। पढ़ें खारीतट संदेश की यह रिपोर्ट…
बिजयनगर। राज्य में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा को रोजगार परक बनाने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग निरंतर प्रयासरत है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इन सरकारी कॉलेजों में मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त नहीं होने से छात्र छात्राओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हम बात कर रहे हैं बिजयनगर के अस्थाई राजकीय महाविद्यालय भवन की, जहां अध्ययनरत 181 छात्र-छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं भी प्रशासन द्वारा नहीं जुटाई गई हैं।

कहने को तो बाड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र में नवीन महाविद्यालय भवन के लिए सरकार साढ़े चार करोड़ रुपए खर्च कर रही है, लेकिन अस्थाई भवन में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए स्वच्छ पेयलज शौचालय सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था नहीं होने से अध्ययनरत छात्र-छात्राएं स्थानीय प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन से खासे नाराज है। हालात यहां तक पहुंच गए कि यहां स्वीकृत 200 सीटों में से 181 पर प्रवेश होने के बावजूद सुविधाएं नहीं होने से छात्र-छात्राएं सप्ताह में कभी कभार ही नियमित कक्षाओं में उपस्थिति दे पा रहे है।

एक माह से कक्षाएं शुरू लेकिन सुविधाएं न के बराबर
स्थानीय राजकीय महाविद्यालय की कक्षाएं अक्टूबर माह से शनि महाराज मंदिर के पास स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में बने तीन कमरों के भवन में संचालित है, लेकिन बीते माह में सरकार और कॉलेज प्रशासन की ओर से यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने से विद्यार्थियों और छात्र संगठन के पदाधिकारियों में रोष व्याप्त है।

एक पानी की मटकी से चल रहा काम
विद्यार्थियों ने बताया कि सरकार ने आनन-फानन में कॉलेज का अस्थाई रूप से संचालन तो शुरू कर दिया लेकिन बिजयनगर में जिस भवन में कक्षाएं चल रही हैं वहां पीने के पानी के लिए नल कनेक्शन तक नहीं है। जबकि कॉलेज के मुख्यद्वार के समीप से पेयजल लाइन गुजर रही है। ऐसे में यहां अस्थाई रूप से कार्यरत बाई जी अपने घर से ही पानी का मटका भरकर लाती है जिससे विद्यार्थी और स्टॉफ पानी पीकर दिन गुजारते हैं।

कॉमन टॉयलेट सबसे बड़ी समस्या
महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं ने बताया कि अस्थाई कॉलेज परिसर बड़ा है लेकिन यहां बना कॉमन टॉयलेट रूम सबसे बड़ी समस्या है। क्योंकि अंदर अलग से टॉयलेट रूम नहीं होने से छात्राओं को परेशानी होती है। छात्राओं ने इस समस्या से प्राचार्य को अवगत कराया तो उन्होंने बजट आने पर इसका निराकरण करने का आश्वासन दिया।

साफ-सफाई नहीं होने से मैदान में नहीं खेल पाते
विद्यार्थियों ने बताया कि 24 नवम्बर से केकड़ी में खो-खो प्रतियोगिता शुरू होगी, जिसमें यहां से खिलाडिय़ों का दल भाग लेने जाएगा। लेकिन मैदान की सफाई नहीं होने, छोटे-छोटे गड्ढे होने से अब तक प्रैक्टिस भी नहीं हो पाई, साथ ही यहां मैदान बड़ा है, लेकिन मिट्टी भराव और समतलीकरण नहीं होने से मैदान का फायदा नहीं मिल पा रहा।

बारी-बारी से लगती है कक्षाएं, बाहर बैठने की नहीं कोई व्यवस्था
विद्यार्थियों ने बताया कि 181 विद्यार्थियों में से रोजाना औसतन 100 से अधिक की उपस्थिति हो जाती है, लेकिन यहां बने तीन कमरों में से एक कमरा प्राचार्य और कार्यालय, एक कमरा स्टॉफ के लिए है। शेष बचे एक हॉल में कक्षाएं संचालित होती है, लेकिन उसमें भी फर्नीचर पर्याप्त नहीं होने से बारी-बारी से विद्यार्थी हॉल में अध्ययन करते हैं। शेष विद्यार्थियों के लिए कॉलेज कैम्पस में बैठने के लिए कहीं भी जगह नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी इधर-उधर घूमते रहते हैं।

गेट खुला नहीं कि आ जाते हैं मवेशी, कचरा पात्र फैला रहा बदबू
विद्यार्थियों ने बताया कि कॉलेज टाइम में दिनभर कॉलेज परिसर में मवेशी विचरण करते हैं, इससे छात्राओं में मवेशियों को लेकर असुरक्षा का माहौल बना रहता है। साथ मोहल्लों में कचरा संग्रहण के लिए बड़ा कचरा पात्र कॉलेज के मेनगेट के पास रखवा देने से दिनभर कचरे की बदबू फैलती रहती है।

कॉलेज में पढ़ाई को लेकर कोई दिक्कतत नहीं है, लेकिन बात सुविधाओं की आए तो बहुत खामियां हैं। यहां विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई गई है। पेयजल के लिए रोजना परेशान होना पड़ता है, टीचिंग ब्रेक के दौरान कॉलेज में बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। वहीं खेलकूद के प्रैक्टिस करने के लिए न उपकरण है और न ही लाइब्रेरी। एक ही क्लासरूम होने से विद्यार्थियों को बारी-बारी से पढऩा पड़ता है। इन समस्याओं से प्राचार्य को अवगत कराया जा चुका है।
आयुष कुमार सोनी, छात्र

क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालय खुला उसकी खुशी थी, लेकिन अस्थाई भवन परिसर में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं यह सबसे बड़ी दिक्कत है। साथ ही पेयजल, खेलकूद, लाइब्रेरी, कक्षा-कक्ष सहित कई परेशानियां है जिससे विद्यार्थियों की उपस्थिति प्रभावित है।
आरती रेगर, छात्रा

एबीवीपी की ओर से विधायक राकेश पारीक को कॉलेज में पीने के पानी की उचित व्यवस्था, कमरों में लाईटें, कॉलेज परिसर में नियमित रूप से साफ-सफाई, छात्र-छात्रा के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था, विद्यार्थियों के इच्छानुसार विषय लेन सहित अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। इस पर विधायक महोदय ने निराकरण का आश्वासन दिया है।
नितिन मुकेश प्रजापति, नगर मंत्री-एबीवीपी, बिजयनगर

व्यवस्था करवा दूंगा
कॉलेज के अस्थाई संचालन के लिए हमने शहर के बीच अच्छी जगह चुनी है। रही बात बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं की तो मैं एक-दो दिन में बिजयनगर आऊंगा तब नगर पालिका की ओर से पेयजल, शौचालय, लाईट और विद्यार्थियों के कॉलेज परिसर में बैठने की व्यवस्था करवा दूंगा।
राकेश पारीक, विधायक, मसूदा

भामाशाहों से अपील
कॉलेज में संसाधन बहुत सीमित है, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट उपलब्ध नहीं है। सरकार से जो बजट स्वीकृत हुआ है वो नई बिल्डिंग के लिए हुआ है। फिर भी हमारा पूरा प्रयास है कि सुविधाएं जुटाई जा सके। इसके लिए क्षेत्र के भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील है कि वे छात्र-छात्राओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए आगे आएं।
दिनेश भार्गव, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय बिजयनगर

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