भक्त प्रहलाद को हरिनाम का सुमिरन कराया था श्रीयादे मां ने

श्री श्रीयादे माता जयन्ती पर विशेष
प्रहलाद ने जन्म से सात दिन तक माता का दूध नहीं पिया। राजमहल में एक तरफ ख़ुशी, एक तरफ दु:ख। हिरण्यकश्यप ने घोषणा की कि जो कोई उसे दूध पिलाएगा उसे पुरस्कार दिया जाएगा, भक्त श्री श्रीयादे माता ने भक्त प्रहलाद को दूध पिलाया व ईश्वरभक्ति का स्मरण करवाया।

बिजयनगर। समाज की आराध्य देवी भक्त शिरोमणी श्री श्रीयादे का जन्मोत्सव हर सजातीय बंधु को प्रतिवर्ष मनाना चाहिए। भक्त शिरोमणी ने प्रहलाद को हरि नाम का उपदेश देकर प्रलयकारी राजा हिरण्यकश्यप के प्रकोप को सकल-जगत की रक्षा कर हमारे कुम्हार समाज का गौरव बढ़ाया था।

आज भारत वर्ष के हर क्षेत्र में श्री श्रीयादे माता के मंदिर स्थापित हैं। मां श्री श्रीयादें मां की जन्म तिथि कौनसी है इस सन्दर्भ में कोई ठोस प्रमाण तो नहीं है, परन्तु अधिकतर कहा जाता है कि उनका जन्म सतयुग के प्रथम चरण में इन्डावृत्त में लायड जी जालंधर की पुत्री के रूप में माघ सुदी 2 (दूज) को हुआ वे बचपन से ही धर्म भीरु थीं।

उनके गुरु उडऩ ऋषि थे। उडऩ ऋषि की धूणी तालेड़ा पहाड़ पर थी। श्री श्रीयादे मां का विवाह गढ़ मुल्तान के सावंतजी के साथ हुआ। आपके दो पुत्र एवं एक पुत्री थी। गढ़ मुल्तान हिरण्यकश्यप की राजधानी थी।

हिरण्यकश्यप को ब्रह्माजी ने उसकी तपस्या के कारण अमर रहने का वरदान था कि वह न आकाश में मरेगा न जमीन पर, न घर में न बहार, न दिन में न रात में, न नर से न पशु से, न अस्त्र से न शस्त्र से आदि वरदान पाकर हिरण्यकश्यप ने राज्य की जनता पर अत्याचार शुरू कर दिया।

भगवन के नाम लेने पर पाबन्दी लगा दी व धर्म कार्यों पर रोक लगा दी। सवंतोजी व श्री श्रीयादे माता का परिवार ही वहां गुप्त रूप से भक्ति करते थे व मिटटी के बर्तन बनाते व भगवान का भजन करते थे। हिरण्यकश्यप के डर से एकांत में भगवान की मूर्तियां पीने के पानी के अंदर रख देते थे।

एक बार हिरण्यकश्यप ने संयोग से प्यास लगने के कारण श्री श्रीयादे के घर जंगल में पानी मांगा तब डर के मारे माताजी ने भगवान को याद कर पानी पिलाया व सोचा कि पानी के घड़े के अंदर मूर्तियों का हिरण्यकश्यप को पता चल गया तो हमें यातनाएं देगा पर भगवान ने उनकी सुनी व पानी में मूर्तियां विलीन हो गईं।

उसी जल प्रभाव से उसकी रानी कुमदा के पुत्र प्रहलाद ने जन्म लिया। प्रहलाद ने जन्म से सात दिन तक माता का दूध नहीं पिया। राजमहल में एक तरफ ख़ुशी, एक तरफ दु:ख। हिरण्यकश्यप ने घोषणा की कि जो कोई उसे दूध पिलाएगा उसे पुरस्कार दिया जाएगा, भक्त श्री श्रीयादे माता ने भक्त प्रहलाद को दूध पिलाया व ईश्वरभक्ति का स्मरण करवाया।

समय आने पर फिर हरि नाम का स्मरण करवाने का वचन प्रहलाद को दिया। समय बीतता गया प्रहलाद मित्रों सहित गुरुकुल जा रहे थे। मार्ग में श्री श्रीयादे माता का निवास स्थान दिखा, वहां न्याव में मिटटी के बर्तन पकाये जा रहे थे। न्याव दहक रहा था, न्याव के पास श्री श्रीयादे माता व सावतोजी आंसू बहाते-बहाते हरि नाम कि रट लगा रहे थे।

प्रहलाद हरि नाम को सुन कर रुके व कहा कि तुम्हें मेरे पिता की आज्ञा मालूम नहीं है? तुम्हें क्या दु:ख है? जब श्री श्रीयादे माता ने कहा कि तुम्हारे पिता से बढ़कर मेरे हरि हैं जो सब की रक्षा करते हैं। माता के पास बिल्ली म्याऊं-म्याऊं कर रही थी। माता ने कहा कि भूल से बिल्ली के बच्चों वाला मटका न्याव में पकने के लिए रख दिया।

बिल्ली के बच्चों की रक्षा के लिए हरि से प्रार्थना कर रहे थे। हरि नाम की महिमा से बिल्ली के बच्चे न्याव जीवित निकल गए। प्रहलाद ने हरि नाम का प्रभाव अपनी आंखों से देखा। जिस मटके में बिल्ली का बच्चा था वह कच्चा ही था, शेष सारे बर्तन पक गए।

माता ने दूध व हरि नाम का मंत्र याद दिलाया व हरि नाम लिया व प्रहलाद भी हरि नाम जपने लगे। हिरण्यकश्यप को मालूम हुआ की उसका पुत्र भी नियमित हरि नाम का जप करता है तो उसने प्रहलाद को कई प्रकार की यातनाएं दी।

प्रहलाद के बाल पकड़ कर जमीन पर पटका, पर्वत से गिराया, विष पिलाया, सर्प से डसवाया, अग्नि में होलिका के साथ जलवाया, होलिका स्वयं जल गई परन्तु प्रहलाद बच गए। प्रहलाद के यातनाओं से भी नहीं मरे तब हिरण्यकश्यप ने स्वयं प्रहलाद को मारने के लिए खम्भे से बांध दिया व तलवार लेकर मारना चाहा तब स्वयं भगवान विष्णु ने खम्भे में से नृसिंह अवतार का रूप धारण कर हिरण्यकश्यप को पकड़कर दरवाजे के बीच न बाहर न अंदर, उसे घुटनों पर आधार रखकर न जमीन पर न आसमान में न दिन न रात न नर न पशु न अस्त्र न शस्त्र उसका पेट नाखूनों से चीर कर अधर्मी अत्याचारी का नाश किया। भक्त प्रहलाद को राजा बना भगवान अदृश्य हो गए।
साभार: सुरेशकुमार प्रजापत, बड़ा आसन (बिजयनगर)

श्री यादे माता जयंती समारोहपूर्वक मनाई जाएगी, सथाना में भजन संध्या आज
सथाना। श्रीश्री यादे माता जयंती महोत्सव एवं समस्त प्रजापति समाज आम चोकला सथाना के तत्वावधान में दो दिवसीय श्री यादे माता जयंती महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। समिति के सचिव सुरेश प्रजापति बड़ा आसन ने बताया कि 18 जनवरी को प्रजापति सभा स्थल सथाना पर भजन संध्या का आयोजन होगा। श्रीश्री यादे मां म्यूजिकल ग्रुप मेवाड़ के केदारमल प्रजापति व श्रवणलाल सेंदरी भजनों की प्रस्तुति देंगे। 19 जनवरी को सुबह महाआरती के बाद शोभायात्रा निकाली जाएगी।

बिजयनगर। गंगा होटल प्रांगण में आम प्रजापति समाज की साधारण सभा की बैठक में श्री यादे मां की जयंती महोत्सव धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। श्री यादे माता की जयंती पर शुक्रवार को तेजा चौक त्रिवेणी माता के मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। बैठक में समाज के अध्यक्ष महावीर लूणिया, त्रिलोकचन्द, भंवरलाल, बाबूलाल, भंवर कपूरपुरा, रमणलाल, सूरज, हरि, कुन्दन, रामलाल, घीसू, लालचन्द, रोहित, ताराचन्द, बुधराज, गणेशलाल आदि मौजूद थे।

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