तुम मुझे दुकान दो, मैं तुम्हें पट्टा बनवा दूंगा…

जब यह अंक आपके हाथ में होगा उसके ठीक अगले ही दिन गणतंत्र दिवस है। आजादी की इस लड़ाई में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नारा दिया था, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’

लेकिन यह बिजयनगर नगर पालिका है। यहां कुछ भी संभव है, और कुछ भी असंभव नहीं। स्वार्थ की बोली में एक पूर्व पार्षद ने सबको पीछे छोड़ दिया। उसने उस बुजुर्ग महिला से कहा, ‘तुम मुझे मुफ्त दुकान दो, मैं तुम्हें पट्टा बनवा कर दूंगा।’

आंखों पर पट्टी लगाकर बैठी नगर पालिका में उसने ऐसा कर दिखाया, जिसे करने में नटवरलाल के भी हाथ कांपते। कहते हैं न कि गलत काम अपना सबूत छोड़ ही देता है। उसकी इसी चूक ने पूरी योजना पर पानी फेर दिया। पूरे फर्जीवाड़ा का लब्बोलुआब यह रहा कि खरीदार के रूपए डूब गए और बेचान करने वाली बुजुर्ग महिला के पास धेला तक नहीं आया…

बिजयनगर।  मिल चौक क्षेत्र में स्थित एक भूखण्ड को धोखाधड़ी से षड्यंत्रपूर्वक कूटरचित दस्तावेज से बेचने और नगर पालिका से खरीदार के पक्ष में नामांतरण खुलवा लेने के प्रकरण में बिजयनगर पुलिस ने पूर्व पार्षद एवं प्रापर्टी व्यवसायी गोपालसिंह राठौड़ को गिरफ्तार कर लिया है।

प्रशिक्षु भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी एवं अजमेर दक्षिण की पुलिस उपअधीक्षक मोनिका सेन ने हाल ही में बिजयनगर थाने में मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज किए थे। इसी बयान के आधार पर गोपालसिंह राठौड़ को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

यह है मामला
स्थानीय इंदिरा कॉलोनी निवासी राजेन्द्र शर्मा ने पिछले वर्ष न्यायिक मजिस्टे्रट प्रथम वर्ग बिजयनगर के समक्ष अधिवक्ता ज्ञानचन्द शर्मा के जरिए राधेगिरी उर्फ मीराबाई पत्नी रामलाल भील और गोपालसिंह राठौड़, मुकेश अग्रवाल, विजय अग्रवाल, निसार मोहम्मद सहित पालिकाध्यक्ष सचिन सांखला व तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सीता वर्मा के खिलाफ एक इस्तगासा भा.द.सं. की धारा 420, 467, 468, 471, 120 (बी) के तहत पेश किया।

इसमें बताया गया कि बिजयनगर के मिल चौक में ब्लॉक नं. 569 के भूखण्ड संख्या 6 पर कोयली उर्फ मीराबाई पत्नी रामलाल भील काफी समय से अतिक्रमी के रूप में काबिज है। उसने 23 नवम्बर 2012 को इस भूखण्ड के पट्टे के लिए आवेदन किया था।

इस आवेदन में इस महिला ने अपने आपको 60 वर्ष से अधिक आयु होने व मौके पर काबिज होने के आधार पर स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टा दिए जाने का आवेदन किया था। नगरपालिका द्वारा पट्टे की आमसूचना जारी किए जाने पर वार्ड संख्या 18 व 9 के निवासियों ने 15 मार्च 2013 को आपत्ति दर्ज कराई।

इस पर नगर पालिका ने पट्टा जारी नहीं किया। इस्तगासे में यह भी बताया गया कि मीराबाई को नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने 1 सितम्बर 1987 को उक्त भूखण्ड पर अवैध निर्माण को लेकर एक नोटिस भी जारी कर 7 दिन के भीतर स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में निर्माण कार्य को नगर पालिका अधिनियम धारा 203 व 170 के तहत ध्वस्त कर दिया जाएगा।

इसके बावजूद मीराबाई ने स्वामित्व सम्बंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए और कब्जे के आधार पर पट्टा दिए जाने के लिए नगर पालिका में आवेदन प्रस्तुत कर दिया। नगर पालिका से पट्टा प्राप्त करने में सफल नहीं होने पर मीराबाई ने गोपालसिंह राठौड़ सहित कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए कूटरचित पट्टा तैयार करवाया।

यह पट्टा भी 5 जून 1957 को राव नारायणसिंह मसूदा के द्वारा जारी करना बताया गया। इसमें ब्लॉक 596 के तहत नगर पालिका मंडल बिजयनगर व बिजयनगर के अधिकारियों ने उनकी जानकारी में कूटरचित पट्टे के आधार पर विक्रय हो जाने की जानकारी होने के बावजूद आपत्तियों को दरकिनार कर विधि सम्मत निस्तारण नहीं किया और कूटरचित पट्टे के सम्बंध में कोई जांच नहीं की।

इस्तगासे में यह था आरोप
इस्तगासे में आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने अनुचित लाभ प्राप्त कर मुकेश अग्रवाल के पक्ष में नामांतरण जारी कर दिया। इस्तगासे में आरोप लगाया गया कि पट्टा 5 जून 1957 का कूटरचित पट्टा है। इस पर राव नारायणसिंह मसूदा के हस्ताक्षर भी नकली है।

पट्टे की जानकारी 22 सितम्बर 2016 से पहले मीराबाई ने कभी भी सम्बंधित विभाग को नहीं दी तथा जून 1957 में उसकी उम्र मात्र 9 वर्ष की थी जो अल्प वयस्क होने के कारण पट्टा प्राप्त करने की योग्य नहीं थी।

इस्तगासे में यह भी बताया गया कि मीराबाई द्वारा विक्रय किया गया भूखण्ड मुकेश ने खरीदा जो कि गम्भीर दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इस्तगासे में यह भी खुलासा किया गया कि नगर पालिका के अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी को कूटरचित पट्टे के तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद मुकेश से अनुचित लाभ प्राप्त कर, सभी नियमों की अनदेखी कर नामांतरण मुकेश के पक्ष में खोलने के आदेश पारित किए जो अपराधिक कृत्य हैं।

न्यायालय ने इस्तगासे पर सुनवाई करने के बाद बिजयनगर पुलिस को मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए। इस पर पुलिस ने विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद पूर्व पार्षद गोपालसिंह राठौड़ को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जहां से राठौड़ को जेल भेज दिया गया।

जमानत खारिज
मामले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे पूर्व पार्षद गोपालसिंह राठौड़ की ओर से उनके वकील ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ब्यावर के समक्ष जमानत का आवेदन प्रस्तुत किया। जिसे न्यायाधीश ने खारिज कर दिया।

यूं हुआ मामला उजागर
गोपालसिंह राठौड़ ने जो पट्टा राव नारायणसिंह मसूदा द्वारा 5 जून 1957 को जारी होना बताया, यहीं से गड़बड़ी की आशंका को बल मिल गया। क्योंकि जागीरदारी प्रथा उन्मूलन कानून 1 अगस्त 1955 को लागू होने के साथ ही रियासतों के सभी अधिकार समाप्त हो चुके थे। सभी अधिकार जिला कलेक्टर को दे दिए गए थे।

मामले में दूसरा तथ्य यह भी है कि 5 जून 1957 को मीराबाई भील की उम्र 9 वर्ष थी जो कि उस समय भी पट्टा लेने के लिए पात्र नहीं थी।

मामले में तीसरा तथ्य यह है कि ब्लॉक संख्या 569 के प्लॉट संख्या 6 दर्शाया गया जो कि नगर पालिका बिजयनगर व स्व. राव नारायणसिंह मसूदा के रियासतकाल के रिकार्ड में इंद्राज नहीं है।

पार्षदों ने भी की शिकायत
पार्षद संजू शर्मा, मोनिका रावत, सुशीला सेन, दीपिका वर्मा, लेखराज बैरवा, सुधा कुमावत, उषा कलवानी, संजय कुमावत, चेतन अरोड़ा, रितु कुमावत, अशोक कुमार, भवानीशंकर राव, जगदीश सिंह राठौड़, रेखा नायक इन्द्रजीसिंह मेवाड़ा व सहवरण सदस्य ललित शर्मा, लक्ष्मण रमलावत आदि ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया था।

इसमें सरकारी जमीनों व एससी-एसटी के भोले-भाले लोगों को मोहरा बनाकर सरकारी अधिकारी व जनप्रतिनिधि की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीनों के बेचान करने वाले भू-माफिया गोपालसिंह राठौड़़ के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई थी।

न्याय मिलने तक जारी रखूंगा लड़ाई
जिस प्रकार भू-माफियाओं और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर भील समाज की जमीन को हड़पना चाहा यह अपराधिक कृत्य है।

एससी-एसटी के भोले-भाले लोगों को गुमराह करके कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जिस प्रकार का षड्यंत्र रचा है वह घोर अपराध है। मैंने इसकी उचित जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।

जब तक भील समाज को न्याय नहीं मिल जाता तब तक मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगा।

राजेन्द्र शर्मा, परिवादी-जिला सहसंयोजक बजरंग दल, ब्यावर

अनुसंधान जारी है…
बिजयनगर निवासी परिवादी राजेन्द्र शर्मा ने एक एफआईआर दर्ज करवाई थी जिसका अनुसंधान जारी है। इस मामले में एक आरोपी को जेल भी हुई है और इस मामले में अनुसंधान अब भी जारी है। जिसके खिलाफ भी आरोप साबित होगा उसकी गिरफ्तारी निश्चित रूप से होगी।
मोनिका सेन, प्रशिक्षु आईपीएस, अजमेर

52 लाख रुपए का था सौदा
मीराबाई भील (86) पत्नी रामलाल भील ने आईजी मालिनी अग्रवाल के सम्मुख नोटरी से सत्यापित एक शपथ पत्र में बताया कि उसका एक 400 गज का भूखण्ड मीरा आश्रम के नाम से जाना जाता है, जिस पर कई वर्षों से उसका कब्जा है। इस भूखण्ड के पट्टे के लिए मैंने नगर पालिका में आवेदन कर रखा था।

मेरे इस भूखण्ड की एक दुकान में गोपालसिंह निवासी नाड़ी मोहल्ला बिजयनगर किराएदार था। उसने मुझसे कहा कि मैं नगर पालिका का पार्षद हूं और पालिका में मेरी अच्छी जान-पहचान है, मैं आपको इस भूखण्ड का पट्टा बनाकर दे दूंगा।

बशर्ते आपको मुझे एक दुकान नि:शुल्क देनी पड़ेगी। इसके अलावा इस भूखण्ड के पूर्व दिशा के हिस्से की ओर 19 गुणा 60 वर्गफीट का स्थान मुकेश अग्रवाल को 52 लाख रुपए में बेचान करना पड़ेगा, इस शर्त पर मैं आपको पट्टा बनवा दूंगा।

मीराबाई ने बयान में बताया कि गोपालसिंह राठौड़ इन शर्तों के बाद पट्टा बनवा कर ले आया और मुकेश के पक्ष में भूखण्ड के उक्त हिस्से का पंजीयन करवा दिया। लेकिन रजिस्ट्री में वर्णित राशि 8 लाख 95 हजार रुपए का चेक देकर उस राशि को भी गोपालसिंह ने बैंक में से निकाल ली। क्योंकि, चेक और पासबुक दोनों उसी के ही पास में थी और मैं उसका पूरा विश्वास करती थी।

बकाया रकम जो मुझे मुकेश कुमार से लेनी थी वह रकम भी मुझे आज दिन तक नहीं दी गई। मैं शपथपूर्वक बयान करती हूं कि मैं अनपढ़ और वृद्ध महिला हूं, जिसका नाजायज फायदा उठाकर इन लोगों ने मुझसे धोखाधड़ी की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar