मन और वातावरण की शुद्धि करता है यज्ञ

आर्य समाज के विद्वान भवदेव शास्त्री ने कहा
बिजयनगर। हर परिवार को चाहिए कि वह अपने यहां यज्ञ का अनुष्ठान करें। यज्ञ से व्यक्ति के मन की शुद्धि होती है। वहीं यज्ञ का धुआं वातावरण को शुद्ध बनाता है। इससे मनुष्य को स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है। यह बात आर्य समाज के विद्वान भवदेव शास्त्री ने कही।

वे रविवार को आर्य समाज मंदिर में समाज के परिवारों के स्नेह मिलन समारोह के अवसर पर आयोजित यज्ञ-सत्संग कार्यक्रम के बाद धर्मसभा को सम्बोधित कर रहे थे।

शास्त्री ने कहा कि जैसे अग्रि में यदि आप मिर्च डालोगे तो उससे वातावरण दूषित होगा। इसी प्रकार यज्ञ में प्रयुक्त हवन सामग्री में पेड़ों की पत्तियां और गाय का शुद्ध घी होने के कारण यह वातावरण को शुद्ध करता है।

जिस घर में वैदिक रीति से यज्ञ करने की परम्परा का निर्वहन किया जाता है वहां अंधविश्वास का नामोनिशान नहीं रहता। उन्होंने धर्मसभा में मौजूद लोगों से आग्रह किया कि सम्भव हो तो नित्य और यदि सम्भव न हो तो सप्ताह में कम से कम एक बार या माह में एक बार यज्ञ के अनुष्ठान में आवश्य भाग लें।

इस मौके पर शाहपुरा आर्य समाज के प्रधान कन्हैयालाल, बिजयनगगर आर्य समाज के प्रधान कृष्णगोपाल शर्मा, मंत्री जगदीश प्रसाद सेन, पुरुषोत्तमसिंह राठौड़, मुकेश सोनी सहित समाज के कई गणमान्य लोग सपरिवार मौजूद थे।

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