धैर्य रख IAS का मुकाम हासिल किया प्रियांशु पहाडिय़ा ने

  • Devendra
  • 19/04/2024
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बिजयनगर। (देवेन्द्र कुमार) आईएएस परीक्षा में सफल हुए बिजयनगर निवासी प्रियांशु पहाडिय़ा से बातचीत…
प्र. आईएएस बनने पर आपको खारीतट सन्देश की ओर से बहुत-बहुत बधाई।
उ. जी धन्यवाद
प्र. आपका यह कौन सा प्रयास था?
उ. यह मेरा पांचवां प्रयास था, इससे पहले मैंने तीन बार मैंस दिया था, उसके बाद यह मेरा पहला इंटरव्यू था जो इसी महीने क्लियर हुआ है। मैंने 2023 में एग्जाम दिया था, जिसका रिजल्ट इस महीने आया है।
प्र. उच्च शिक्षा आपने कौन से संकाय से उत्तीर्ण की?
उ. मैं नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक सेंट पॉल स्कूल बिजयनगर का छात्र रहा हूं, उसके बाद मैंने ग्रेज्युएशन कॉमर्स फैकल्टी से शहीद भगत सिंह कॉलेज दिल्ली से की। इसके साथ मेरा जो ऑप्शनल सब्जेक्ट फिलॉसफी का था जिसकी मैंने अच्छे से तैयारी की, उसके लिए कोचिंग भी गया।
प्र. आईएएस क्लियर करने के लिए आपने रोजाना कितने घंटे पढ़ाई की?
उ. शुरू-शुरू में तो मैंने में पढ़ाई पर बहुत समय दिया लेकिन थोड़े दिन बाद टाइम मैनेजमेंट करते हुए 8-10 घंटे रोजाना पढ़ाई करता था। ग्रेज्युएशन और आईएएस की तैयारी करने के चलते पढऩे का बेहतर तालमेल बना रहा।
प्र. आईएएस की तैयारी आपने कैसे की?
उ. मैंने कोचिंग ऑप्शनल सब्जेक्ट की ही ली थी, आईएएस की तैयारी के लिए ऑनलाइन कंटेंट यूट्यूब एवं इंटरनेट के माध्यम से देखा करता था, साथ ही मैंने बेसिकली आईएएस की तैयारी ग्रेज्युएशन के साथ ही शुरू कर दी थी, इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं आई। आईएएस बनने का मेरा 12वीं तक कोई टारगेट नहीं था, यह टारगेट तो मैंने ग्रेज्युएशन में आने के बाद बनाया। कोविड के टाइम मैंने पूरी तैयारी ऑनलाइन कंटेंट के जरिए ही की, इसलिए उस वक्त पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना पड़ा।
प्र. तैयारी के दौरान आपने कौन-कौनसी सर्तकताएं बरती?
उ. आईएएस की तैयारी के दौरान मैंने सोशल मीडिया से दूरी रखी, मेरा कहीं कोई अकाउंट नहीं है, इंस्टाग्राम आईडी बनी हुई थी, लेकिन कभी नहीं चलाई। पढ़ाई को लेकर मैंने कभी ज्यादा तनाव नहीं लिया। पिछले दो सालों से मैं दिल्ली ही रहा, बिजयनगर और परिवार में बहुत कम ही आया था। इसलिए पढ़ाई के लिए अच्छा समय मिलता रहा।
प्र. आईएएस बनने के पीछे आपकी क्या धारणा थी?
उ. मैं जब दिल्ली कॉलेज में ग्रेज्युएशन कर रहा था, तो वहां सभी बच्चे आईएएस की तैयारी में लगे हुए थे। सभी ने सोच रखा था कि आईएएस बनेंगे तो मैंने भी अपने उन दोस्तों की सलाह पर तैयारी शुरू कर दी, सभी यही कहते थे कि आईएएस की नौकरी सबसे अच्छी है।
प्र. अब आप आईएएस बन चुके है तो ऐसे में आपकी क्या प्राथमिकता रहेगी?
उ. अभी रिजल्ट आया है, अभी कुछ भी फिक्स नहीं है, क्योंकि रिजल्ट के बाद डेढ़ दो साल की ट्रेनिंग पिरियड होती है, उसके बाद कन्फर्म होगा कि कौनसे फिल्ड में सर्विस रेग्युलर होगी।
प्र. आपके आईएएस बनने के पीछे किन-किन लोगों का सहयोग या प्रेरणा रही?
उ. मेरी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय मैं मम्मी-पापा को ही दूंगा, क्योंकि उन्होंने कभी भी मेरा धैर्य कमजोर नहीं होने दिया। मैंने पांच मर्तबा प्रयास किया, मम्मी-पापा यही कहते रहे कि बेटा फिर प्रयास करो, जरूर आईएएस बनोगे। मेरी सफलता में मेरे भाई का भी मोटिवेशन रहा वो भीलवाड़ा में सीए हैं। साथ ही मेरे दिल्ली कॉलेज के टीचर, फ्रेंड्स मुझे डेली मोटीवेट करते रहते थे, इन सभी की प्रेरणा के बदौलत यह मुकाम पाया है। मैं संयुक्त परिवार में पला बड़ा हूं। सभी की प्रेरणा उनके द्वारा दी गई सीख मेरे जीवन में बहुत काम आई।
प्र. आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उ. जीवन में सफलता और असफलता सिक्के के दो पहलु होते हैं। इसलिए हमें पहली असफलता पर हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि और अच्छे आत्मविश्वास के साथ पुन: प्रयास करना चाहिए। मैं भी पांचवें प्रयास में सफल हुआ हूं, इसलिए असफलताओं से हमें कतई नहीं घबराना चाहिए। साथ ही सभी से कहना चाहूंगा कि अगर आप एग्जाम की तैयारी में लगे हुए हैं तो सोशल मीडिया से दूरी रखेंगे तो बेहतर परिणाम पा सकेंगे।

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