रेलवे में इस साल प्रौद्याेगिकी पर ज़ोर रहेगा – पीयूष

नई दिल्ली। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि इस साल रेलवे का पूरा जोर क्षमता विस्तार के लिए प्रौद्याेगिकी के प्रयोग पर होगा और करीब 60 हजार किलोमीटर के मुख्य नेटवर्क मेें विश्व की आधुनिकतम ईटीसीएस-2 प्रौद्योगिकी लगाने का काम शुरू हो जाएगा।

श्री गोयल ने आम बजट में रेल मंत्रालय से जुड़े पहलुओं पर संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि आम बजट में सरकार ने रेल मंत्रालय के प्रस्तावों को शत प्रतिशत समर्थन दिया है। रेल नेटवर्क को सुरक्षित बनाना और क्षमता विस्तार करना मुख्य प्राथमिकता है।

इसके लिए पूंजीगत व्यय में वर्ष 2013-14 की तुलना में तीन गुना आवंटन किया गया है जबकि संरक्षा के लिए पहली बार सर्वाधिक 73 हजार करोड़ रुपए के व्यय का प्रावधान किया गया है जो मुख्यत: प्रौद्याेगिकी आधारित उपायों के लिये प्रयोग किया जाएगा। यह रेलवे के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।

इस मौके पर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, राजेन गोहाईं, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी और बोर्ड के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि रेलवे ने क्षमता विस्तार के लिए दोहरीकरण, तिहरीकरण चौथीलाइन और नयी लाइनें बिछाने तथा अमान परिवर्तन के बाद अब अपने 150 साल पुराने सिगनलिंग सिस्टम को सिरे से बदलने की योजना बनायी है।

करीब 60 हजार किलोमीटर मार्ग पर अत्याधुनिक ईटीसीएस-2 सिगनल प्रणाली को चार से पांच साल के अंदर लगाया जाएगा। इससे लाल, पीले, हरे रंगों पर आधारित सिगनल प्रणाली की जगह इलैक्ट्रॉनिक सिगनल प्रणाली काम करेगी और एक सेक्शन में दो दो मिनट के अंतर पर चलायी जा सकेंगी।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सिगनल प्रणाली को बदलने के लिए रेलवे बोर्ड ने कोई वित्तीय आकलन नहीं किया है और ना ही ऐसा किया जाएगा। इसकी बजाए ठेका पाने की इच्छुक अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों से ही पूछा जाएगा कि वे कितनी लागत में यह काम कर सकतीं हैं।

उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में ईटीसीएस-2 सिगनल प्रणाली करीब 60 हजार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर लगी है जबकि भारत भी इतने ही लंबे ट्रैक पर इसे लगाना है। उन्होंने कहा कि रेलवे सबसे कम लागत बताने वाली एक ही कंपनी को पूरा ठेका दे सकती है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह से रेलवे सबसे कम लागत पर इस नयी सिगनल प्रणाली को लगाया जा सकेगा।

रेल मंत्री ने कहा कि इसी साल चेन्नई के पेराम्बूर में बन रहा पहला ट्रेनसेट आ जाएगा। प्रौद्योगिकी स्थायित्व आने के बाद सरकार का इरादा ऐसे कम से कम सौ ट्रेन सेट बनाने की है। उन्होंने कहा कि संरक्षा को भी प्रौद्योगिकी से जोड़ कर देखा जा रहा है। इसीलिए सभी स्टेशनों और ट्रेनों को सीसीटीवी कैमरों और वाई-फाई सेवा से लैस किये जाने का प्रस्ताव किया गया है।

ट्रैक के रखरखाव के लिए अल्ट्रासोनिक जांच करने वाली स्पार कार बड़ी संख्या में खरीदने का निर्णय किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में मुुंबई और बेंगलुरु में उपनगरीय रेलसेवा में क्रमश: 51 हजार करोड़ रुपए और 17 हजार करोड़ रुपए की महत्वांकाक्षी योजना बनायी है। दोनों शहरों में करीब डेढ़ -डेढ़ सौ किलोमीटर लाइनें बिछायीं जाएंगी जिनमें करीब चालीस प्रतिशत लाइन एलिवेटेड होगी।

इससे बेंगलुरु में भी लोगों की आवाजाही कम से कम समय में सुलभ होगी। एक सवाल के जवाब में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने कहा कि पूर्वी एवं पश्चिमी समर्पित मालवहन गलियारों में वर्तमान मार्ग पर चलने वाले सभी मालगाड़ियां स्थानांतरित नहीं की जाएंगी बल्कि एक नया बाज़ार विकसित किया जाएगा।

उन्होंने 600 स्टेशनों के पुनर्विकास के बारे में उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर भी नया मॉडल बनाया गया। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि निजी उद्योगपतियों को रेललाइन बिछाने और रेलवे को कुछ लाइसेंस फीस दिला कर उन्हें स्वतंत्र परिवहन की छूट दिलाने की अनुमति देने को लेकर सकारात्मक रूप से विचार किया जा सकता है।

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