रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की संख्या होगी आधी, बुलेट ट्रेन की लागत भी होगी कम

नई दिल्ली। (वार्ता) भारतीय रेलवे के कायाकल्प की योजना को शीघ्र ही अमल में लाया जाएगा जिसके तहत रेलवे बोर्ड में तैनात अधिकारियों की संख्या लगभग आधी करके ज़ोनल मुख्यालयों पर बोर्ड के कार्यालय खोलने की तैयारी हो रही है।

रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में रेलवे बोर्ड के सदस्यों को इस प्रकार की कई कार्ययोजनाओं को तैयार करके पेश करने के निर्देश दिए गये हैं। सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की संख्या सितंबर 2017 में संख्या का आधा करने और ज़ोनल रेलवे मुख्यालयों मेें रेलवे बोर्ड के कार्यालय खोलने की योजना बनायी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि रेलवे के प्रतीक चिह्न, गाड़ियों के रंगरोगन आदि को बदल कर भारतीय रेलवे के पूरे ब्राण्ड को बदलने की योजना है।
रेलवे अपने सभी 13 लाख कर्मचारियों को अपना मकान सुलभ कराने के लिए सक्रियता से काम करेगी और वित्तीय संस्थानों से सस्ता ऋण उपलब्ध कराने की भी योजना बना रही है।

रेलवे इसके अलावा ज़ोनल रेलवे में खाली पदों को तुरंत समाप्त करने, त्वरित निर्णय प्रक्रिया के लिए बोर्ड द्वारा ज़ोनल रेलवे को अधिक अधिकार देने, रेलवे स्वास्थ्य सेवा के डाॅक्टरों को फील्ड में तैनात करने, सेना के सेवानिवृत्त अस्पताल प्रबंधकों को नियुक्त करने, एक रेल अस्पताल के साथ एक मेडिकल कॉलेज को जोड़ने, एक लाख 30 हजार एप्रेंटिंस को कार्यशालाओं एवं कारखानों में नौकरी देने, दिव्यांगों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण देने और उन्हें स्टेशन एवं गाड़ियों में सवार होने की सहूलियतें देने, सभी स्टेशनों पर सेनेटरी पैड डिस्पेंसर लगाने, जनौषधि केन्द्र खोलने और निजी क्षेत्र एवं उद्योगों की साझीदारी से शौचालयों तथा प्लेटफॉर्म पर बेंचों के निर्माण एवं रखरखाव की भी योजना को तैयार कर रही है।

देश के सभी रेलवे परिसरों एवं ट्रेनों में वाई-फाई, सिगनलिंग और सीसीटीवी को एकसाथ जोड़ने तथा रेलटेल के माध्यम से श्रेष्ठतम सेवाएं सुलभ कराने, दस हजार प्लास्टिक बोतल निस्तारण मशीनें लगाने की योजना बनायी जा रही है। एलएचबी कोचों से अधिक उन्नत नयी पीढ़ी के एल्युमिनियम कोच बनाने, विश्व के श्रेष्ठतम वैगन की डिज़ायन तैयार करने और देश में हाईस्पीड रेलवे की लागत आधी लाने पर भी विचार किया जा रहा है।

कहा गया है कि अगर रेलवे मेट्रो की तर्ज पर वर्तमान रेलवे ट्रैक के बगल में मेट्रो की तर्ज पर खंभों पर दस हजार किलोमीटर ट्रैक खड़ा करे तो उस पर बहुत कम लागत पर 200 से 250 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति वाली गाड़ियां चलायीं जा सकती है। देश के सभी धार्मिक तीर्थस्थलों एवं पर्यटनस्थलों को रेल संपर्क से जोड़ने की भी योजना बनाने के निर्देश दिए गये हैं।

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