राजग गठबंधन के सहयोगी दलों का रूख भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण होगा

नई दिल्ली। मिशन 2019 के लिए जुटी भाजपा के लिए राजग गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों का रुख बड़ी चुनौती हो सकता है। खासकर दक्षिण में सबसे बड़े सहयोगी के रूप में खड़े टीडीपी का तेवर तल्ख होता जा रहा है। रविवार को विजवाड़ा में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सांसदों की बैठक बुलाई है। उससे पहले ही टीडीपी सांसद ने दिल्ली में जंग का एलान कर दिया। बजट में आंध्र को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि रविवार की बैठक में तीन विकल्पों पर विचार होगा जिसमें राजग से बाहर आने का भी विकल्प है।

महाराष्ट्र में शिवसेना ने पहले ही 2019 का चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर दी है। खुलेआम आलोचना से वह पहले भी बाज नहीं आती रही है। बजट को भी पार्टी ने विपक्ष के लहजे में कठघरे में खड़ा किया। उत्तर प्रदेश में भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर ने प्रदेश सरकार में रहते हुए भी खुलेआम जंग छेड़ दिया है। अपनी ही सरकार पर खुलेआम आरोप लगा रहे हैं।

बिहार में छोटे छोटे कुछ दलों की चुप्पी कुछ कहती है। लेकिन टीडीपी की दोस्ती खास है। पर पिछले दिनों में तनाव दिखने लगा है। सीधे तौर पर आंध्र को स्पेशल फंड न देने का आरोप लगाया जा रहा है। लेकिन अंदरूनी तौर पर इस खिंचाव का कारण वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी हैं। दरअसल आंध्र मे यह राजनीतिक अटकल भी लगाया जा रहा है कि भविष्य में जगन मोहन और भाजपा एक नाव पर सवार हो सकते हैं। हालांकि जगन मोहन के राजनीतिक वोटबैंक को देखते हुए यह बहुत आसान नहीं होगा। क्योंकि वह मुख्यतया मुस्लिम और इसाई वोट वर्ग में पैठ रखते हैं। लेकिन टीडीपी को यह डर सता रहा है। कारण भी है। जब जगन की पार्टी के कुछ विधायक टूट कर टीडीपी में शामिल हुए तो भाजपा नेताओं ने उल्टा बयान दिया था।

बहरहाल रविवार की बैठक पर भाजपा नेतृत्व की भी नजर होगी। राज्यसभा में टीडीपी के सांसद टीजी वेंकटेश ने कहा- हम तीन विकल्प पर विचार करेंगे- ‘सरकार से बाहर आना, सभी लोकसभा सांसदों का इस्तीफा होना और राजग से बाहर आना।’ दरअसल कुछ दिनों पहले नायडू ने भी राज्य मे पार्टी की एक बैठक में कथित रूप से कहा था कि जब राज्य का विभाजन हुआ था तो उन्होंने दोनों राज्यों को बराबरी से संसाधन देने की बात कही थी। ऐसा लगा था कि केंद्र सरकार आंध्र की मांग को पूरा करेगी। लेकिन अब चार साल होने को है। सूत्रों के अनुसार टीडीपी यह रणनीति भी बना चुकी है कि जगन अगर भाजपा के साथ गए तो उसे भी आंध्र विरोधी करार दिया जाएगा।

जाहिर है कि 2019 के लिए पिछली बार से भी बड़ा लक्ष्य तय कर चल रही भाजपा को अपना कुनबा द्रुरुस्त रखना होगा। चार दिन पहले राजग संसदीय दल की बैठक में यूं तो शिवसेना या टीडीपी नेताओं की ओर से कोई भी सवाल नहीं उठा। लेकिन अगर राजग दरका तो परेशानी बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व जल्द ही राजग दलों के नेताओं की बैठक बुला सकती है। आखिरी बैठक पिछले साल अप्रैल मे हुई थी।

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