श्री शिवमहापुराण कथा ज्ञान यज्ञ: वेदों की जननी है गायत्री मंत्र

बांदनवाड़ा (राजेश मेहरा) कथावाचक राधेश्याम जी व्यास महाराज ने कहा कि गायत्री मंत्र वेदों की जननी है। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों से चौबीस देवियां प्रकट हुई है। इस मंत्र के उच्चारण से पापों का नाश होता है।

वे बुधवार को कस्बे के भिनाय रोड स्थित महासिंह बाबा मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय विराट संगीतमय श्री शिवमहापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे।

उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के उच्चारण से सभी पूजा सम्पूर्ण हो जाती है। ईश्वर ने बोलने व सुनने की शक्ति इंसान को दी है, अत: कुछ समय भक्ति भाव में व्यतीत करना चाहिए। राम का नाम सर्वोपरि है।

भगवान शिव के मुख से निकला मंत्र राम नाम का ही था, जिसमें पूरा ब्रह्माण्ड समाया है। पापी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके कान में यदि तीन बार राम नाम का जाप कर दिया जाए तो उसका भी उद्धार हो जाता है।

कथा के चौथे दिन महाराज ने सद्गुरु महत्व गृहस्थ में गृह मंदिर की स्थापना विधि, कम समय में नित्य पूर्ण फलदायी देव पूजन विधि के बारे में बताया। साथ ही संतान सुख, सम्पत्ति, शांति, धन, यश, व्यापार विधि आदि के बारे में बताया।  इस मौके पर कई श्रद्धालु महिलाएं व पुरुष उपस्थित थे।

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