तेईस मार्च से नए अंदाज में होगा आंदोलन का आगाज-अन्ना हजारे

तेईस मार्च भगतसिंह-सुखदेव-राजगुरू का शहादत दिवस होने से इस दिन का चयन किया गया है।
झुंझुनूं । सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि किसानों एवं लोगों की समस्या को लेकर आगामी तेईस मार्च से दिल्ली के रामलीला मैदान से एक नए अंदाज में आंदोलन का आगाज किया जायेगा।

श्री हजारे आज यहां शहीद स्मारक पर आयोजित भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन की सभा में बाेल रहे थे। उन्होंने कहा कि जन लोकपाल एवं किसानों की समस्याओं से जुड़े करीब बाईस पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे, लेकिन शायद उनके पास जवाब देने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी तेईस मार्च से दिल्ली के रामलीला मैदान से एक नए अंदाज में आंदोलन का आगाज होगा।

अहिंसा का मार्ग अपनाते हुए अनशन पर बैठकर सरकार को किसानों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए बाध्य किया जाएगा। तेईस मार्च भगतसिंह-सुखदेव-राजगुरू का शहादत दिवस होने से इस दिन का चयन किया गया है।

उन्होंने साफ किया कि इस बार कोई केजरीवाल अन्ना आंदोलन से पैदा नहीं होगा। अन्ना के आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों के शपथ पत्र लिए जाएंगे कि वे किसी पार्टी से न संबद्ध रखते है और न ही रखेंगे। साथ ही कभी भी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि देश के राजनेता पैसे और सत्ता के चक्कर आमजन का हित भूल चुके हैं। सरकार के पास जनता के लिए योजना के नाम पर वादे के अलावा कुछ नहीं है। पिछले दिनों सरकार ने किसान की फसल का समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात तो कही लेकिन उस पर अमल होने की बात आई तो कहा कि नीति आयोग से इस बारे में राय ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि देश एवं समाज की सेवा के लिए अब सरकारों एवं राजनेताओं के भरोसे बैठने का समय नहीं रहा है। अब युवाओं के नेतृत्व में पूरे समाज को आगे आना होगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जनता के पैसे पर नेता मजे कर रहे हैं जबकि जनता को छलावे के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।

श्री हजारे ने कहा कि किसान बेहद आर्थिक तंगी में जीवन जीता है, इसलिए जिनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है उन सीमांत एवं बुजुर्ग किसानों को सरकार को पांच हजार रूपए प्रतिमाह पेंशन देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज तक किसी उद्योगपति ने आत्महत्या नहीं की लेकिन मौसम एवं कर्ज की मार से दुखी होकर अभी तक बारह लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं लेकिन किसी भी सरकार ने किसानों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई है, सब को उद्योगपतियों की चिंता है।

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