भारत के खिलाफ पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार बना जैश

नई दिल्ली। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुजवां स्थित आर्मी ब्रिगेड पर आतंकी हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को बचाने में क्यों पाकिस्तान के हुक्मरान कोई कसर नहीं छोड़ते। मसूद हाल के वर्षो में पाकिस्तानी सेना के भारत विरोधी एजेंडे का मुख्य आधार बन गया है।

अल-कायदा व तालिबान के साथ तकरीबन दस वर्ष गुजार चुका मसूद आज की तारीख में कश्मीर के लिए सबसे खूंखार आतंकियों की फौज तैयार करने, उन्हें प्रशिक्षण देने से लेकर उन्हें कश्मीर में स्थानीय सहयोग दिलाने तक की रणनीति बना रहा है। इसमें उसे पाकिस्तानी सेना व हुक्मरानों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है क्योंकि पिछले दो वर्षो से मसूद को बाहरी दुनिया से पूरी तरह से छिपा कर रखा गया है।

पठानकोट हमले के बाद सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया अजहर
भारतीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि मसूद अजहर के बारे में कोई ठोस सूचना जनवरी, 2016 में हुए पठानकोट हमले के समय ही सामने आई थी। तब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कानून मंत्री राणा सनाउल्लाह ने स्वीकार किया था कि मसूद को एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। यह पहला मौका था जब पाक में मसूद अजहर को गिरफ्तार किया गया था लेकिन उसके बाद से उसको लेकर वहां के हुक्मरान व सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।

भारतीय खुफिया एजेंसियों को इस बात की जानकारी मिली है कि जैश मुखिया ने पिछले कुछ महीनों में चार बड़े आयोजन किये हैं। दिसंबर के पहले हफ्ते में रावलकोट में कश्मीर पर एक कार्यक्रम किया गया था जहां स्थानीय स्टेडियम में जैश की तरफ से एक कैंप भी लगाया गया। स्थानीय जैश आंतकियों ने अनजाने में इसके पोस्टर शहर में लगा दिये थे जिसमें मौलाना मसूद अजहर का जिक्र था। अगले दिन ही आनन फानन में स्थानीय प्रशासन ने इन पोस्टरों को हटवाया और यह भी सुनिश्चित किया कि कोई भी मीडिया हाउस स्टेडियम में ना तो पहुंच सके और न ही उसकी कोई सूचना बाहर आये।

इसके बाद तीन चार हफ्ते पहले ही लरकाना (सिंध) में जैश की तरफ से कश्मीर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें जल्द ही भारतीय सेना पर एक बड़ा हमला करने की चेतावनी भी दी गई थी। खुफिया एजेंसियों की मानें तो अजहर पिछले दो वर्षो से से किसी भी ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेता जहां से उसके फोटो या वीडियो के बाहर जाने का शक होता है।

2017 में पेशावर से दिया था एक बयान
सिंध, करांची जैसे शहरों जैश के भारत विरोधी आयोजनों में अजहर का भाई मौलाना तल्हा सियाफ उसके भाषणों को पढ़ता है। मसूद ने नवंबर, 2017 में पेशावर से एक बयान जरुर दिया था जो पुलवामा कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथों मारे गये उसके भतीजे तल्हा राशीद के बारे में था। उसने राशीद के मृत शरीर को लेने से मना कर दिया था। जैश सरगना की पाकिस्तान में कितनी चलती है उसे इस बात से समझा जा सकता है कि बहावलपुर स्थित उसके हेडक्वार्टर की सुरक्षा में उसके आतंकियों के साथ स्थानीय पुलिस भी लगी होती है। बहावलपुर में जिस मस्जिद से उसका संगठन चलता है उसके बारे में कोई भी स्थानीय मीडिया में कोई सूचना प्रकाशित करने की मनाही है।

पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान सरकार की तरफ से गठित एसआईटी की कोई रिपोर्ट बाहर नहीं आई। उस पर पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशरर्फ पर हमला करवाने की साजिश रचने का इल्जाम लगाया गया लेकिन उस मामले में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद पाक चीन के साथ मिल कर अजहर को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचा कर रखे हुए है।

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