पीएनबी घोटाला: आरोपियों पर कसा चौतरफा शिकंजा, 2 साल पुरानी बंद फाइल भी खुलेगी

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक को 11400 करोड़ रुपये का चूना लगाने के आरोप में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ एजेंसियों का चौतरफा शिकंजा कस गया है। मेहुल चौकसी के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग की धाराओं के तहत नए मुकदमें के साथ सीबीआइ और ईडी की छापे की कार्रवाई जारी रही।

वहीं सीबीडीटी ने नीरव मोदी की 29 संपत्तियों को जब्त कर लिया है। ईडी के अनुरोध पर विदेश मंत्रालय ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का पासपोर्ट चार हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही मेहुल और नीरव के खिलाफ एसवी हरीप्रसाद की शिकायत की फाइल फिर से खुल गई है।

61 स्थानों पर ईडी और सीबीआइ के छापे
पंजाब नेशनल बैंक की नई शिकायत के बाद सीबीआइ ने  चौकसी, उसकी तीन कंपनियों, इन कंपनियों के निदेशकों और दो बैंक अधिकारियों के खिलाफ नई एफआइआर दर्ज किया है। इसके बाद  सीबीआइ ने चौकसी और नीरव मोदी के 26 ठिकानों पर छापा मारा। जबकि सीबीआइ की एफआइआर के आधार पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज करते हुए ईडी ने भी 35 जगहों पर तलाशी ली। दोनों एजेंसियों के छापे में पुरानी और नई एफआइआर दोनों से जुड़े ठिकाने शामिल थे।

अब तक कुल 5649 करोड़ रुपये की चल संपत्ति जब्त
छापे के दौरान ईडी ने शुक्रवार को फिर से 549 करोड़ रुपये बुक वैल्यू की ज्वेलरी, सोना और हीरे जब्त किये। इस तरह कुल जब्त अचल संपत्तियों की बुक वैल्यू 5649 करोड़ रुपये पहुंच गई है। 5100 करोड़ रुपये की चल संपत्ति ईडी ने गुरुवार को जब्त किया था।

वहीं चौकसी के सूरत स्थित फैक्ट्री में छापे के दौरान सीबीआइ को बड़ी मात्रा में हीरे मिले हैं। इन हीरों के ईडी को सौंप दिया है। ईडी अब इनकी कीमत का आकलन कर रहा है। इसके बाद इन्हें जब्त किया जाएगा। इसके अलावा चौकसी और नीरव मोदी के खिलाफ सीबीडीटी भी सक्रिय हो गया।

सीबीडीटी ने दोनों की 29 अचल संपत्तियों को जब्त कर इसकी जानकारी ईडी को सौंप दी है। इन 29 अचल संपत्तियों के अलावा ईडी को नीरव और मेहुल की छह अन्य अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनकी पुष्टि की जा रही है। जरूरी कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद इन्हें भी जब्त कर लिया जाएगा।

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का पासपोर्ट निलंबित
ईडी के अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए विदेश मंत्रालय ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का पासपोर्ट चार हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है। यदि ये दोनों इसके बाद भी वापस आकर जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो उनका पासपोर्ट हमेशा के लिए निरस्त किया जा सकता है।

पासपोर्ट निरस्त करने के अलावा ईडी ने नीरव मोदी के विदेश स्थित चार शोरूम में बिक्री बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। नीरव मोदी के मुंबई स्थित हेड आफिस से न्यूयार्क, लंदन, मकाऊ और बीजिंग स्थित शोरूम को निर्देश जारी करवाया गया कि इनमें एक भी सामान नहीं बेचा जाए। भारत स्थित मेहुल और नीरव के शोरूम और दफ्तर पहले ही सील हो चुके हैं। इस तरह इन दोनों की कंपनियों का काम पूरी तरह ठप्प कर दिया है।

पीएनबी अधिकारियों से पूछताछ
छापे की कार्रवाई के साथ ही सीबीआइ की टीम पीएनबी के चार अधिकारियों से दिन भर पूछताछ करती है। इनमें नरीमन प्वाइंट स्थित ब्रांच में फरवरी 2015 से अक्टूबर 2017 के बीच मुख्य प्रबंधक रहे बेचू तिवारी, ब्राडी हाउस ब्रांच में मई 2016 से मई 2017 के बीच सहायक महाप्रबंधक रहे संजय कुमार प्रसाद, जोनल आडिट आफिस में मई 2015 से जुलाई 2017 के बीच कॉनकरेंट आडिटर रहे और अभी मुख्य प्रबंधक मोहिंदर कुमार शर्मा के साथ-साथ नवंबर 2014 से दिसंबर 2017 तक एसडबल्यूओ रहे मनोज खराट शामिल हैं।

खुलने लगी घोटाले की परतें
सीबीआइ और ईडी की जांच से घोटाले की परते धीरे-धीरे खुलने लगी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 11400 करोड़ रुपये के कुल घोटाले में चोकसी की तीन कंपनियों को कुल 4886 करोड़ रुपये के लेटर आफ अंडरस्टैंडिंग और लेटर आफ क्रेडिट जारी किए थे।

बाकि की रकम नीरव मोदी की कंपनियों को जारी किये गए थे। आरोपियों के काम करने का तरीका बड़ा ही शातिराना था। एक बार एलसी और एलओए जारी करने के बाद वे उनकी मियाद खत्म होने के ठीक पहले नया एलओए और एलसी जारी करा लेते थे।

यानी बैंक का पैसा ही बैंक में घुमाते रहते थे। कोर बैंकिंग सिस्टम में इस रकम का चढ़ाया ही नहीं जाता था। यही कारण है कि पीएनबी को सात साल तक इस घोटाले की भनक ही नहीं लगी।

पीएनबी ही नहीं, दूसरे बैंक भी जिम्मेदार
सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घोटाले के इतने साल तक चलने के लिए सिर्फ पीएनबी के अधिकारी ही नहीं, बल्कि दूसरे बैंक भी उतने ही जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार आरबीआई की साफ गाइड लाइंस है कि हीरे-जवाहरात के कारोबार से जुड़ी कंपनियों को 90 दिन से अधिक का एलसी या एलओए जारी नहीं किया जाएगा।

जबकि पीएनबी से एक साल का एलसी व एलओए जारी किये जाते है। जिन बैंकों के विदेश स्थित ब्रांच में इन्हें भुनाया जाता रहा, उनमें किसी ने यह सवाल नहीं उठाया कि आरबीआइ के दिशानिर्देश के विपरीत एक साल के लिए जारी किये जाने एलओयू और एलसी पर किसी ने सवाल नहीं उठाया।

पुरानी शिकायत की भी फाइल खोलने की तैयारी
2016 में जिस एसवी हरीप्रसाद की शिकायत पर कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, उसकी फाइल को फिर से खंगाला जा रहा है। बताया जाता है कि हरीप्रसाद ने जांच एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों से शुक्रवार को मुलाकात भी की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हरीप्रसाद का मामला नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा फ्रेंचाइजी देने में धोखाधड़ी से जुड़ा है। इसकी अलग से पड़ताल की जा रही है और जरूरत पड़ने पर नया केस दर्ज किया जा सकता है।

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