राजस्थान के चार जिलों में फैला ग्लेण्डर्स रोग

जयपुर राजस्थान में ग्लेण्डर्स रोग ने अब तक राज्य के चार जिलों राजसमंद, धौलपुर, अजमेर और उदयपुर में अपने पैर पसार लिए हैं।
पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी ने आज बताया कि घोड़ों एवं अन्य अश्ववंशीय पशुओं के साथ ही मनुष्यों में फैलने वाले ग्लेण्डर्स रोग की राज्य के इन चार जिलों में होने की पुष्टि हुई है, जिसकी वजह से अधिसूचना जारी कर इन जिलों को नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन जिलों के अलावा आमजन और अश्वपालकों को इस रोग से घबराने की आवश्यकता नहीं है। श्री सैनी ने बताया कि ग्लेण्डर्स रोग को नियंत्रित करने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि ‘पशुओं में संक्रामक, संसर्गजन्य रोग निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 2009‘ के प्रावधानों के तहत नियंत्रित जिलों में ग्लेण्डर्स रोग की रोकथाम, नियंत्रण एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों को नियंत्रण क्षेत्र घोषित कर अश्ववंशीय पशुओं के आवागमन, पशुबाजार/हाट, मेले, प्रदर्शनी और इन पशुओं के एकत्रीकरण पर प्रतिबंध रहेगा, जिससे कि इस रोग को फैलने से रोका जा सके।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि छूत की बीमारी ग्लेण्डर्स ग्रस्त पशु के सम्पर्क में आने वाले मनुष्य को भी यह रोग हो सकता है। इस रोग की रोकथाम के लिए अभी तक कोई टीका ईजाद नहीं हुआ है। यही कारण है कि रोग की पुष्टि होने पर एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र को नियंत्रित घोषित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि नियंत्रित जिलों में रोग की पुष्टि के लिए घोड़ों एवं अश्ववंशीय पशुओं के रक्त के नमूने जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में स्थित राज्य/क्षेत्रीय पशु रोग निदान प्रयोगशालाओं के अलावा हिसार स्थित एनआरसीई भेजे जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य में करीब दो महीने पहले अजमेर जिले के किशनगढ क्षेत्र के पाटन गांव में इस बीमारी से एक घोड़े की मौत हो जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने गत 20 अक्टूबर से आगामी पांच नवम्बर तक चलने वाले प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेले में घोड़ों एवं अन्य अश्ववंशीय पशुओं के लाने एवं खरीद फरोख्त पर प्रतिबंद लगा दिया । इसके बाद पुष्कर में पशु पालकों ने प्रतिबंद हटाने के लिए प्रदर्शन भी किया।
बताया जा रहा है कि कई वर्षों पहले ही भारत में यह रोग समाप्त हो चुका था लेकिन राजस्थान में इसके मामले सामने आने लगे हैं।

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