मेरे गुरुदेव पधार रहे हैं…

अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव का आगाज, धर्ममय हुआ बिजयनगर, पुरुष ध्वल वस्त्र व चुनरी के साफे में व महिलाएं केसरियां साड़ी में पहुंची, वरघोड़ा के जुलूस में उमड़ी श्रावकों की श्रद्धा
बिजयनगर। श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मंदिर ट्रस्ट की ओर से राजदरबारसिटी परिसर में आयोजित अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव का आगाज बुधवार को जैन समाज के संत जिन मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज के मंगल प्रवेश के साथ हुआ। महाराज के 27 मील चौराहे पर पहुंचने पर जैन धर्मावलम्बियों ने पुष्प वर्षा से उनका स्वागत किया, जुलूस के रूप में महाराज को बजरंग चौराहे स्थिति श्री संभवनाथ जैन मंदिर पर लाया गया।

यहां पर महाराज के कुछ देर विश्राम करने के बाद वरघोड़ा का शानदार जुलूस ढोल-ढमाके, गाजे-बाजों के साथ निकाला गया तो नजारा कुछ और ही था। यहां जुलूस आरम्भ होकर शहर के मुख्य बाजारों से निकला।

जुलूस में शामिल महिलाओं के अलग-अलग समूह में मधुर भजनों की स्वर लहरियों पर नाचते गाते चल रही थी। कृषि मण्डी चौराहे पर स्थित होण्डा शोरूम पर माहेश्वरी समाज की ओर से जुलूस में शामिल लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। यहां मदनगोपाल बाल्दी एवं उनके पुत्रों ने महाराजश्री का आशीर्वाद लिया।

इसके बाद जुलूस यहां से रवाना होकर पीपली चौराहे होते हुए राजदरबार सिटी पहुंचा जहां मुख्य द्वार पर केसरिया साड़ी में सजी-धजी सुहागिन महिलाओं ने कलश के साथ महाराज की चरण वन्दना कर आशीर्वाद लिया।

इसके बाद महाराज श्री को ससम्मान साधु साध्वी मण्डली के साथ पाण्डाल में ले जाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में श्री प्राज्ञ पब्लिक स्कूल के छात्र वैभव बाबेल ने स्कूल के बैण्ड की धुन पर स्वागत गीत ‘मेरे गुरुदेव पधार रहे हैं’ की मधुर प्रस्तुति दी। वहीं महिलाओं ने मंगलगीत की स्वरलहरियां बिखेर कर कार्यक्रम में समां बांध दिया।

जुलूस के दौरान व समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में सिक्यूरिटी गार्उ ने सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा सम्भाल रखा था। इनमें 8 महिला सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहीं।
ये हुए शामिल
इस अवसर पर उपखंड अधिकारी सुरेश चावला, पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला, उपाध्यक्ष सहदेवसिंह कुशवाह, अधिशासी अधिकारी कमलेश कुमार मीणा, भाजपा नेता नवीन शर्मा, माहेश्वरी पंचायत के अध्यक्ष प्रमोद जागेटिया, चिरंजी नवाल, महेन्द्र सिंघवी, ट्रस्ट के मंत्री पवन बोरदिया, जितेन्द्र मुणोत, संजय खाब्या, नीलम दूनीवाल, अंकित सांड, सुमित दूनीवाल, ज्ञानचन्द खाब्या, संजय टेलर, रूपचन्द नाबेड़ा, संजय काशलीवाल, अमित गोखरू, राजेन्द्र झंवर, प्रदीप मेड़तवाल, संजय श्रीमाल, अजय सांड, प्रतापचन्द सांड, टीकमचन्द गोखरू, दिलीप मेहता, अरविन्द लोढ़ा, गौतम भंसाली, मनीष जिंदल, अनिल नाबेड़ा, जितेन्द्र छाजेड़, सम्पतराज बाबेल, विनयराज सिंघवी, सुरेन्द्र नाहर, महावीर कोठारी, महावीर पामेचा, अविनाश गादिया, सुरेन्द्र पीपाड़ा, राजकुमार काल्या, पदमचन्द रांका, विकास चोरडिय़ा, श्रीधर काबरा, महावीर नाबेड़ा, विमल भंडारी, पियुष चौपड़ा, मिठ्ठूलाल नाहर, गोपीचन्द चोरडिय़ा, राजेन्द्र कोठारी, निलेश मेहता, विमल कोठारी, तेजमल बुरड़, प्रेमचन्द सेन, मिठ्ठूलाल काशलीवाल, हरीश चोरडिय़ा, अनिल कुमार, मदनगोपाल बाल्दी, विनय कर्नावट, राजेश बाफना, नेमीचन्द गोखरू, पदमचन्द चोरडिय़ा, मनीष बडौला, संदीप सांखला, अनिल कच्छारा, महावीर कच्छारा, सुनिल नाबेड़ा, प्रदीप चौधरी, सुरेन्द्र कुमार, नरेन्द्र कुमार बाफणा, मूलचन्द नाबेड़ा, भंवरलाल कोठारी, विनय भंडारी, मनोहर कोगटा, मोहित गोखरू, राजेश मुणोत, महेन्द्र गोधा, रामपाल तोषनीवाल, अंकित तातेड़, गोरू नागौरी, दिलीप तातेड़, संजीव कोठारी, सुनिल मेहता, सुभाष लोढ़ा, पुखराज डांगी, अभिषेक डांगी, हंसराज पोखरना, सुखराज चोरडिय़ा, मनीष चोरडिय़ा, अशोक टिकलिया, ताराचन्द लोढ़ा, नौरतमल भण्डारी, सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

सर्व समाज के लिए होते हैं संत
राजदरबार में आयोजित धर्मसभा में जिन मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज ने कहा
आज समाज ऊंच-नीच, गरीबी-अमीरी, उच्च वर्ग-निम्न वर्ग सहित विभिन्न वर्गों में बटा हुआ है। इस खाई को अगर कोई पाट सकता है तो वो है सन्त समाज। जैन धर्म पर किसी विशेष जाति या जैन धर्मावलम्बियों का ही एकाधिकार नहीं है, सन्त सर्व समाज के लिए होता है।

यह उद्गार सन्त जिन मणिप्रभसूरीश्वर महाराज ने बुधवार को यहां श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मन्दिर ट्रस्ट की ओर से राजदरबार सिटी परिसर में आयोजित अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। महाराज जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी ने कहा कि प्राचीन भारत का इतिहास इस बात का गवाह है कि हिन्दुस्तान में रहने वाली समस्त जातियां चाहे ब्राह्मण हों, क्षत्रिय हों या वैश्य, सभी में सन्तों ने जन्म लिया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यह सही है कि देश में सर्वाधिक सन्त ब्राह्मण समाज से आए हैं। वहीं अधिकांश जैन सन्त अपने सांसारिक जीवन में क्षत्रिय वर्ग से ताल्लुक रखते थे। इसी प्रकार देश में क्षुद्र वर्ग ने भी देश को महान सन्त दिए हैं। सन्त समाज की यह विशेषता है कि इसमें शरीक होने वाला किस समाज से सम्बन्ध रखता है यह बात नगण्य हो जाती है।

सन्तों में कोई भेदभाव नहीं होता। कोई ऊंच-नीच नहीं होती। सन्त एक साथ भोजन करते हैं और एक साथ विहार भी करते हैं। एक साथ धर्म चर्चा करते हैं, साथ-साथ आध्यात्म की ओर अग्रसर होते हैं। इससे समाज को सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऊंच-नीच, गरीबी-अमीरी की खाई को पाटना होगा तभी सच्चे अर्थों में सन्तों का सन्देश जन-जन तक पहुंचेगा।

अपने सम्बोधन में महाराज ने बिजयनगर के पहले भक्त स्व. श्री उत्तमराजजी सिंघवी को भी याद किया। अन्त में उन्होंने बल देते हुए कहा कि जैन दर्शन जैन समाज पर किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं है। जो भी व्यक्ति इस ओर आकर्षित होगा तो उसके जीवन का कल्याण अवश्य होगा तथा वह व्यक्ति अपने जीवन में प्रेम, दया, करुणा, विनम्रता, सरलता आदि सद्गुण स्वत: ही प्राप्त कर लेगा।

सौभाग्य को जगाने वाले श्री भगवान आए हैं-साध्वी डॉ. श्री नीलांजना
समारोह स्थल पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए साध्वी डॉ. श्री नीलांजना श्रीजी म.सा. ने इन पंक्तियों के साथ जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज का स्वागत किया। आज बिजयनगर की धरा पर मेहमान आए हैं, मंत्रमुग्ध कर देने वाले मेहमान आए हैं, रुह को राहत देने वाले मेहमान आए हैं, हिला अम्बर, हिली दसों दिशाएं, हमारे सौभागय को जगाने वाले श्री भगवान आए हैं।

इस मौके पर साध्वी श्री विद्युतप्रभाश्री जी म.सा. ने बिजयनगर में अपने चातुर्मास प्रवास की घोषणा की। जिसका पाण्डाल में मौजूद श्रावक-श्राविकाओं ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

यह है अंजनशलाका विधान
बिजयनगर के धार्मिक इतिहास में पहली बार अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है। इस विधान में आचार्य प्रवर पूर्व रात्रि में प्रतिष्ठाचार्य के मंत्रोचार के बीच समस्त प्रकार की विशिष्ट क्रियाओं को सम्पादित करते हुए सोने के कटोरे एवं सोने की छड़ी से प्रतिमाओं का अंजन आंजकर प्रतिमा प्रतिष्ठा की प्रक्रिया सम्पादित कर बिजयनगर की धरा को भगवान पाश्र्वनाथ एवं भगवान नाकोड़ा भैरव का सान्निध्य प्रदान करने की सौगात देंगे। यही प्रक्रिया अंजनशलाका कहलाती है।

उन्होंने इसे और स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस प्रकार कागज के टुकड़े पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते ही वह नोट (करंसी) बन जाता है। वह मुद्रा कहलाने लगती है और उसकी वैल्यू बढ़ जाती है। ठीक उसी प्रकार पाषाण की प्रतिमा में विधि विधान, धार्मिक क्रियाओं व मंत्रोच्चार के साथ प्राणों का संचार गुरु भगवंतों द्वारा किया जाता है तो वो ‘अंजनशलाका’ कहलाता हैं। अंजनशलाका के बाद पाषाण की प्रतिमा पूजनीय हो जाती है।
-जैसा कि साध्वी डॉ. श्री नीलांजनाश्री जी म.सा. ने बताया

बाड़मेर व जयपुर में प्रतिमाओं का निर्माण
मंदिर में प्रतिष्ठापित होने वाली श्री मूलनायक श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ परमात्मा की प्रतिमा का निर्माण बाड़मेर के विशेषज्ञ मूर्तिकार ने किया है। वहीं अन्य प्रतिमाओं का निर्माण जयपुर के मूर्तिकारों ने किया है।

यह है मंदिर का इतिहास
श्री नाकोड़ा भैरव के लिए स्थानीय श्री नाकोड़ा भैरव पूर्णिमा मंडल ट्रस्ट की ओर से 9 अक्टूबर 2011 को महापूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उसके बाद 11 मार्च 2011 को भूमि पूजन, 15 जनवरी 2017 को शिलान्यास समारोह, 26 नवम्बर 2017 को पूज्य गुरुवर्या बहिन महाराज डॉ. श्री विद्युतप्रभा श्री जी म.सा. के सान्निध्य में जाजम मुहूर्त का आयोजन किया गया।

इस समारोह में भामाशाहों ने मंदिर निर्माण के लिए मुक्त हाथों से चढ़ावे चढ़ाए। इस मंदिर में मूलनायक श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ परमात्मा की विशाल प्रतिमा समेत श्री दादा जिन कुशल सूरीजी, श्री नाकोड़ा भैरवदेव, लब्धि निधान गौतम स्वामी, माता अम्बिका देवी, माता पद्मावती देवी, जिन श्री कांतिसूरी जी गुरुदेव की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित होंगी।

यह होगा खास
हेलीकाप्टर से होगी पुष्प वर्षा
12 मार्च को मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही कस्बे के लोगों पर हेलीकाप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी।
सजेगा बाजार
पूरे शहर के बाजारों को दुलहन की तरह सजाया जाएगा। कस्बे के समस्त मंदिरों पर विशेष सजावट की गई है।
मेडिकल टीम
आयोजन स्थल पर चिकित्सकों सहित मेडिकल टीम मौजूद रहेगी। इसके अलावा महोत्सव कार्यक्रम के दौरान 7 से 12 मार्च तक कार्यक्रम स्थल पर 24 घंटे रोगी वाहन भी उपलब्ध रहेगा।
चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे सुरक्षाकर्मी
महोत्सव के दौरान बिजयनगर पुलिस थाना सहित राजस्थान पुलिस के जवान व एक निजी सुरक्षा कम्पनी के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे। पूरे महोत्सव क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सीसीटीवी में कोई भी गड़बड़ी नजर आने पर महोत्सव के लिए स्थापित नियंत्रण कक्ष का प्रभारी पुलिस को सूचना तुरन्त दे सकेगा।
सुसज्जित पांडाल
महोत्सव के लिए आधुनिक सुविधाओं हेतु सुसज्जित पाण्डाल सजाया गया हैं। इसमें एक साथ 5000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। पाण्डाल में शानदार साज सज्जा व साउण्ड की व्यवस्था भी की गई है।
सोने पर सुहागा
श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मंदिर ट्रस्ट बिजयनगर के विनम्र आग्रह के कारण पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वर जी म.सा. अन्य साधु-साध्वियों के साथ बिजयनगर में चातुर्मास प्रवास की घोषणा भी समारोह में करेंगे। इसको लेकर जैन समाज में
अति उत्साह का वातारवण है।
ये होंगे कार्यक्रम
गुरुवार 8 मार्च
जन्म कल्याणक विधान, सुबह 9 बजे चयवन कल्याणक महोत्सव, चौदह स्वप्न दर्शन, स्वप्न फल महोत्सव एवं जन्मकल्याणक महोत्सव 56 दिक् कुमारी महोत्सव, इन्द्रासन कंपन, सुघोषा घंट वादन, इन्द्र महोत्सव, मेरू पर्वत पर 250 अभिषेक दोपहर में श्री पाश्र्वनाथ पंचकल्याणक पूजा
शुक्रवार 9 मार्च
सुबह 6 बजे परमात्मा के 18 अभिषेक, सुबह 9 बजे प्रियवंदा दासी द्वारा बधाई, नाम स्थापना, पाठशाला गमन कार्यक्रम के पश्चात दोपहर में शांतिनाथ पंच कल्याणक पूजा होगी।
शनिवार 10 मार्च
ध्वज दंड, कलशादि अभिषेक, राज्याभिषेक, नवलोकांतिक देवों का आगमन तथा प्रार्थना, परमात्मा का विवाह व मामेरा के बाद दोपहर 2 बजे महावीर स्वामी षट्कल्याणक पूजा होगी।
रविवार 11 मार्च
सुबह 7 बजे देवी पूजन, परमात्मा की दीक्षा कल्याणक का वरघोड़ा व दीक्षा कल्याणक विधान, दोपहर 2 बजे दादा गुरुदेव की पूजा के बाद रात्रि में अंजनशलाका महाविधान खरतरगच्छाधिपति द्वारा सम्पन्न करवाया जाएगा।
सोमवार 12 मार्च
सुबह शुभ मुहूर्त में माणकस्तंभ आरोपण, तोरण विधान, परमात्मा की प्रतिष्ठा होगी। दोपहर में अष्टोत्तरी शांति स्नान महापूजन होगा। इसी दिन शाही करबा के साथ 36 कौम का फलेचूंदड़ी (गौतम प्रसादी) का आयोजन होगा।
मंगलवार 13 मार्च
सुबह द्वारोदघाटन एवं सत्रहभेदी पूजा के साथ महोत्सव का समापन होगा।
जैसा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेन्द्रराज सिंघवी ने बताया।
यह है अंजनशलाका विधान
बिजयनगर के धार्मिक इतिहास में पहली बार अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है। इस विधान में आचार्य प्रवर पूर्व रात्रि में प्रतिष्ठाचार्य के मंत्रोचार के बीच समस्त प्रकार की विशिष्ट क्रियाओं को सम्पादित करते हुए सोने के कटोरे एवं सोने की छड़ी से प्रतिमाओं का अंजन आंजकर प्रतिमा प्रतिष्ठा की प्रक्रिया सम्पादित कर बिजयनगर की धरा को भगवान पाश्र्वनाथ एवं भगवान नाकोड़ा भैरव का सान्निध्य प्रदान करने की सौगात देंगे।

यही प्रक्रिया अंजनशलाका कहलाती है। उन्होंने इसे और स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस प्रकार कागज के टुकड़े पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते ही वह नोट (करंसी) बन जाता है। वह मुद्रा कहलाने लगती है और उसकी वैल्यू बढ़ जाती है। ठीक उसी प्रकार पाषाण की प्रतिमा में विधि विधान, धार्मिक क्रियाओं व मंत्रोच्चार के साथ प्राणों का संचार गुरु भगवंतों द्वारा किया जाता है तो वो ‘अंजनशलाका’ कहलाता हैं। अंजनशलाका के बाद पाषाण की प्रतिमा पूजनीय हो जाती है।
-जैसा कि साध्वी डॉ. श्री नीलांजनाश्री जी म.सा. ने बताया
संकल्प हुआ पूरा, 12 मार्च को खाएंगे मिठाई
बिजयनगर के कुछ धर्मावलम्बियों ने 11 नवम्बर 2011 को लिया था, जो 12 मार्च 2018 को पूरा होने जा रहा है। संकल्प लेने वाले ये धर्मावलम्बी करीब छह साल बाद 12 मार्च को मिठाई खाएंगे।

नाकोड़ा पार्श्वनाथ भैरव मंदिर ट्रस्ट (बिजयनगर) के अध्यक्ष योगेन्द्रराज सिंघवी ने खारीतट संदेश को बताया कि राजदरबार कॉलोनी में श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मंदिर का निर्माण पूरा होने और अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव पूर्ण होने तक मिठाई का सेवन नहीं करेंगे। यह भी हैं संकल्परत : पवन बोरदिया, रूपचन्द नाबेड़ा, विमल धम्माणी, जितेन्द्र मुणोत, अरिवन्द लोढ़ा, जितेन्द्र छाजेड़, निहालचन्द नाबेड़ा, ललिता नाबेड़ा, सुनिता नाबेड़ा सहित श्री नाकोड़ा भैरव पूर्णिमा मंडल के सदस्य ने भी नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने तक मिठाई त्याग का संकल्प लिया हुआ है।
इनके जिम्मे यह रहेगी व्यवस्था
आयोजन की व्यवस्था का जिम्मा विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों ने उठाया। विडियोग्राफी एवं बेस्ट फोटोग्राफी के लिए मेघा मूवी बिजयनगर, आवास व्यवस्था के लिए सुरेन्द्रकुमार, नरेन्द्रकुमार बाफणा बाफण जैन तीर्थ और जीवराजमल, मुकेश कुमार संचेती, महाराजा पैलेस बिजयनगर, शिल्प व्यवस्था के लिए घनश्याम प्रसाद, रोशनलाल भीनमाल, विधि कारक अरविन्द भाई इंदौर, संगीतकार नरेन्द्र भाई, वाणीगोता मुम्बई, पिन्टु स्वामी-बीकानेर, मास्टर संयम नाबेड़ा हैदराबाद, टेंट व्यवस्था रांकावत टेंट हाउस, तख्तगढ़, ईवेंट मैनेजर बड़ौदा के राहुल ए संघवी, महोत्सव के लिए लजीज भोजन व मिष्ठान बनाने की जिम्मेदारी बिजयनगर के हलवाई गोविन्द शर्मा और अजमेर के हलवाई गोपाल गुर्जर को सौंपी गई है।

मंडली गरबा भावनगर मंडली, राजस्थानी गैर की प्रस्तुति बालोतरा के कलाकार देंगे। महोत्सव के लिए विरम गांव की प्रसिद्ध मंजिरा मंडली को भी आमंत्रित किया गया है। खड़कवाली ढोल के लिए भीनमाल के दिनकर बैंड को आमंत्रित किया गया है। महोत्सव का टीवी पर सीधा प्रसारण पारस चैनल की ओर से किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar