अवसर और चुनौती!

इस विराट आयोजन को शब्दों की माला में पिरोकर पन्नों में समेटना उतना ही दुरुह है जितना कि समुद्र को किसी पात्र में समेटना। सीमित साधनों में इस आयोजन के हर पहलुओं को अपने सुधि पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एक चुनौती भरा कार्य है। इस चुनौती को मुनियों, साध्वियों के आशीर्वाद से ही पूरा किया जा सकता है।
बिजयनगर में जैन धर्म के शास्त्र के अनुसार राजदरबार में अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव गुरुवार से शुरू हो रहा है। बिजयनगर की धरती जैन मुनियों, साध्वियों और देश-विदेश से हजारों की संख्या में आने वाले श्रावकों की चरण-धूलि से पवित्र होगी वहीं अम्बर भी पवित्र मंत्रोच्चार से गूंजायमान होगा। बिजयनगर-गुलाबपुरा सहित आसपास के जैन समाज सहित विभिन्न समाज के लोग इसके साक्षी होंगे।

खारीतट संदेश को भी इस पावन बेला का साक्षी रहने का अवसर मिलेगा। इस विराट आयोजन को शब्दों की माला में पिरोकर पन्नों में समेटना उतना ही दुरुह है जितना कि समुद्र को किसी पात्र में समेटना। सीमित साधनों में इस आयोजन के हर पहलुओं को अपने सुधि पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एक चुनौती भरा कार्य है।

इस चुनौती को मुनियों, साध्वियों के आशीर्वाद से ही पूरा किया जा सकता है। आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के समक्ष भी चुनौतियां कम नहीं हैं। इन चुनौतियों को साझा कर बिजयनगर की मान और मर्यादा को बरकरार रखा जा सकता है।

खैर, इस आयोजन को लेकर बिजयनगर नगर पालिका, प्रशासन, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के समक्ष अवसर भी है और चुनौती भी। अवसर इसलिए कि अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव बिजयनगर की धरती पर हो रहा है और चुनौती इसलिए कि मुनियों, साध्वियों व दूर-दूर से आने वाले श्रावकों के मानस-पटल पर शहर की छवि का किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसलिए इस आयोजन में हर समाज और हर धर्म के लोगों की सहभागिता अपेक्षित है।

थोड़ा और उदार हों तो इस आयोजन में हर व्यक्ति की सहभागिता जरूरी है। हालांकि अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव से जुड़े पदाधिकारियों ने काबिले-तारीफ व्यवस्था की है। आयोजन से जुड़े हर पहलुओं पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। चाहे व शहर की सजावट का हो या फिर श्रावकों के ठहरने, उनके भोजन आदि की व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

इसी तरह आयोजन स्थल पर बने भव्य पाण्डाल, मंच, विद्युत सज्जा तथा अंजनशलाका प्रतिष्ठा को लेकर आयोजकों की तैयारियां व्यवस्थित, भव्य, उम्दा व अविस्मरणीय है। फिर भी यदि कहीं कोई कमी दिखे तो हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि उसे दूर करें। खासकर, शहर में कहीं भी गंदगी दिखे तो उसे नि:संकोच कचरा पात्र में रख दें।

नगर पालिका को भी जगह-जगह कचरा पात्र लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। याद रखें, शहर की सफाई-व्यवस्था ही यहां की छवि और मर्यादा का आईना होगा। जाहिर है, हर कोई घर के आईने पर पड़ी धूल को साफ कर ही अपना चेहरा देखता है। आईए शहर के आईने को मिलकर साफ-सुथरा रखने में एक-दूसरे का हाथ बंटाएं।

वाहनों को बेतरतीब न रख कर पार्किंग में ही खड़ा कर ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रखने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। यह आयोजन हम सब का है। आइए, मिल-जुल कर, आपसी सहयोग से इस आयोजन को संकल्प बनाएं। जय हिन्द। जय जिनेन्द्र।

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