देश में इलाज बहुत महंगा हैं, सरकार इस ओर ध्यान दें: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश में इलाज पर आने वाले खर्च को “अत्यधिक” बताते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से “कुछ करने” के लिए कहा। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अत्यधिक खर्च की वजह से लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि हाल ही में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कहा था कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के चार निजी अस्पतालों में मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क का बड़ा हिस्सा गैर-अनुसूचित दवाओं (बगैर डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली दवाइयां) और नैदानिक (बीमारी का कारण जानने के लिए होने वाली जांच) सेवाओं का होता है और इनका मार्जिन 1,192 फीसदी तक है।

एपीपीए ने इस संदर्भ में लो ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एडरेनर नामक दो मिली के इंजेक्शन का उदाहरण भी दिया था। सर्वोच्च अदालत पर्यावरणविद एमसी मेहता की 1985 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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