भारत-फ्रांस में महत्वपूर्ण सैन्य समझौता, मोदी ने बताया स्वर्णिम कदम

नई दिल्ली। भारत और फ्रांस ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल एवं सैन्य साजो-सामान के आदान-प्रदान के बारे में एक महत्वपूर्ण समझौता करने के साथ ही हिन्द महासागर क्षेत्र में सहयोग के लिए आज एक संयुक्त दृष्टि पत्र जारी किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इनैमुएल मैक्रों ने यहां द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों की सामरिक साझीदारी के बीस साल पूरे होने के मौके पर इसे नयी ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच द्विवार्षिक शिखर बैठकों तथा रक्षा मंत्रियों के बीच वार्षिक बैठक के आयोजन का निर्णय लिया गया।

दोनों नेताओं की शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के बाद रक्षा, शिक्षा , अंतरिक्ष , गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा सहित 14 क्षेत्रों में सहयोग के अहम समझौते किये गये। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने संयुक्त दृष्टि पत्र जारी किया। उन्होंने बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान राफेल के खरीद सौदे के निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढने पर भी संतोष व्यक्त किया।

गोपनीय तथा संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा के बारे में भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण समझौता किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार फिलिप्पे एटिने ने इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर किये।

श्री मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा , “ सैन्य साजो सामान के आदान प्रदान के समझौते को मैं हमारे घनिष्ठ रक्षा सहयोग के इतिहास में एक स्वर्णिम क़दम मानता हूँ।” इसके तहत दोनों देशों की सेना साजो सामान की आपूर्ति , युद्ध अभ्यास , प्रशिक्षण , मानवीय सहायता और आपदा कार्यों में भी सहयोग करेंगे। अमेरिका के बाद फ्रांस दूसरा बड़ा देश है जिसके साथ भारत ने इस तरह का समझौता किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों का मानना है कि भविष्य में विश्व में सुख-शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए हिन्द महासागर क्षेत्र की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। चाहे पर्यावरण हो, या सामुद्रिक सुरक्षा, या सामुद्रिक संसाधन, या मुक्त नौवहन। इन सभी क्षेत्रों में हम सहयोग मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसलिए, आज हम इस बारे में संयुक्त दृष्टि पत्र जारी कर रहे हैं।
श्री मैक्रों ने भारत के साथ सामरिक साझेदारी को ‘नयी गति’ देने की जरूरत पर बल दिया और कहा “ दोनों देशों के बीच सामरिक भागीदारी महत्वपूर्ण है।

” उन्होंने कहा कि फ्रांस चाहता है कि भारत उसका बड़ा सामरिक साझीदार बनें क्योंकि दोनों देशों का एक ही दृष्टिकोण है। दोनों देशों का अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी साझा लक्ष्य है और दोनों ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी मिलकर काम करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के साथ साथ दोनों देश जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भी मिल कर काम कर सकते हैं । कार्बन उत्सर्जन रोकने की दिशा में कदम उठाना जरूरी है। रक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर उन्होंने कहा कि दीर्घावधि की परियोजनाएं दोनों पक्षों के लिए परस्पर लाभकारी हो सकती हैं।

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरीके से जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के खात्मे के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहरायी।

दोनों पक्षों ने आतंकवादियों की शरण स्थली और उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद करने तथा उनका वित्त पोषण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आह्वान किया। उन्होंने दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बने अल कायदा, आईएस, जैश ए मोहम्मद , हिज्बुल मुजाहिदीन , लश्कर ए तैयबा और उनसे जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की भी बात कही।

श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों के कई आयाम हैं। रेलवे, शहरी विकास, पर्यावरण, सुरक्षा, अंतरिक्ष, यानि ज़मीन से आसमान तक, ऐसा कोई विषय नहीं है जिस पर हम दोनों मिल कर काम न कर रहे हों। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी हम सहयोग और समन्वय के साथ काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कल वह राष्ट्रपति मैक्रों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के स्थापना सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

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