घरेलू कामगारों के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू

नयी दिल्ली (वार्ता) केंद्र सरकार ने घरेलू कामगारों को श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने तथा न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सूत्रों ने यहां बताया कि शहरी जीवन में घरेलू कामगारों की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन ये लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर है। इनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई नीति नहीं है जिसके अभाव में घरेलू कामगारों को अक्सर शोषण का शिकार होना पड़ता है। देश में कुल श्रम बल में घरेलू कामगारों का हिस्सा लगभग एक प्रतिशत है। घरेलू कामगारों को उनकी मेहनत के अनुसार वेतन नहीं दिया जाता है।
सरकार को मानना है कि घरेलू कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय नीति की जरुरत है जिससे ये लोग गरिमा पूर्ण जीवनयापन कर सके। राष्ट्रीय नीति में घरेलू कामगारों के लिए श्रम अधिकारों की सुनिश्चितता और सुरक्षित कार्य माहौल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। नीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू कामगारों को श्रम कानूनों के दायरे में लाना है।

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