अविस्मरणीय आयोजन

यह संत के प्रति समर्पण, आदर और स्नेह ही था कि संत के एक बुलावे पर छत्तीस कौम के लोग एक जाजम पर बैठे। यह उधार का संस्कार नहीं था और न ही दिखावे का। यह आयोजन धर्म की बारीकी और भव्यता का संगम रहा। इसी संगम को तो गंगा-जमुनी तहजीब कहते हैं।
बिजयनगर के राजदरबार में आयोजित अंजनशलाका महोत्सव अपनी भव्यता के लिए लोगों के स्मृतिपटल पर वर्षों तक अंकित रहेगा। इस आयोजन को सफल बनाने में सभी ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। हजारों की संख्या में दूर-दूर से आए श्रावकों के जेहन में बिजयनगर की छवि सकारात्मक रही। सुखद स्मृति के साथ वे यहां से विदा हुए।

इसी तरह श्रावकों ने भी आयोजकों के दिशानिर्देश का पालन करते हुए शिकायत का मौका नहीं दिया। इसके लिए सभी को साधुवाद। देश की गंगा-जमुनी तहजीब में शहर का कोई बड़ा आयोजन किसी समाज अथवा व्यक्ति का निजी नहीं होता। यह पूरे शहर का होता है। जैन मुनि जिनमणिप्रभ सुरीश्वरजी म.सा. ने मंगलप्रवेश के दिन राजदरबार में आयोजित धर्मसभा में कहा था, ‘संत सर्व समाज के लिए होते हैं।‘ यह संत का संदेश था।

बिजयनगर के सर्व समाज ने इस आयोजन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर संत के इस कथन को अक्षरश: साबित कर दिया। यह संत के प्रति समर्पण, आदर और स्नेह ही था कि संत के एक बुलावे पर छत्तीस कौम के लोग एक जाजम पर बैठे। यह उधार का संस्कार नहीं था और न ही दिखावे का। यह आयोजन धर्म की बारीकी और भव्यता का संगम रहा। इसी संगम को तो गंगा-जमुनी तहजीब कहते हैं।

दरअसल, यह यहां की संस्कृति का संस्कार था। मनुहार (आमंत्रण) की मर्यादा का सभी ने बखूबी पालन कर इस आयोजन को भव्यता और विराटता में श्रीवृद्धि की। बिजयनगर का यह शानदार आयोजन वर्षों तक याद किया जाता रहेगा। आमतौर पर सफाई के प्रति उदासीन रहने वाला बिजयनगर नगर पालिका प्रशासन इस आयोजन पर मुस्तैद दिखा।

नगर पालिकाध्यक्ष सचिन सांखला व पालिका के अधिशासी अधिकारी कमलेश कुमार मीणा सफाई कर्मचारियों के साथ आयोजन स्थल पर जिस तन्मयता से डटे रहे, उसकी तारीफ की जानी चाहिए। इसी तरह श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेन्द्रराज सिंघवी, मंत्री पवन बोरदिया, कोषाध्यक्ष पुखराज डांगी, दिलीप मेहता, जितेन्द्र मुणोत, रूपचन्द नाबेड़ा, विकास चोरिड़या, अनिल नाबेड़ा, जितेन्द्र छाजेड़, सुभाष लोढ़ा सहित सम्पूर्ण माहेश्वरी समाज, अग्रवाल समाज, ब्राह्मण समाज, सिंधी समाज, मुस्लिम समाज, जांगिड़ समाज, दिगम्बर जैन सहित 36 कौम एवं शहर की सभी स्वयंसेवी संस्थाएं के सदस्य सहित ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों ने तन-मन-धन से जिस तरह इस आयोजन सफल बनाने का प्रयास किया, उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।

छह साल बाद संकल्प पूरा होने के बाद जिन धर्मावलम्बियों ने मुंह मीठा किया, उन्हें बधाई। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो थाना प्रभारी भवानी सिंह भी पूरे अमले के साथ मुस्तैद दिखे। इसी तरह पाण्डाल बनाने वाले कारीगरों, स्वादिष्ट भोजन बनाने वाले हलुवायियों, बिजली, पानी, सफाई की समुचित व्यवस्था करने में लगे सभी कर्मचारियों को भी साधुवाद।
जय हिन्द, जय जिनेन्द्र

दिनेश ढाबरिया, सम्पादक

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