सस्ते मकान बनाने में रियल एस्टेट कंपनियां बढ़ायें अपनी भूमिका: नायडू

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आज कहा कि देश में बेघर लोगों में 96 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर तथा मघ्यम आय वर्ग के हैं इसलिए सस्ते मकान बनाने में निजी क्षेत्र और रियल एस्टेट कंपनियों को अधिक भूमिका निभानी चाहिए।

श्री नायडू ने यहां रियल एस्टेट डेवेलपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सीआरइडीएआई) के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में इस बात पर चिंता जतायी कि बिचौलियाें के कारण मकान की कीमतें बढ़ रही है इसलिए कीमतों में सुधार की जरूरत है।

श्री नायडू ने कहा कि तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण आैर गांवों से लोगों के पलायन के कारण मकानों की बेहद कमी हो गयी है। उन्होंने कहा कि इस समय देश में एक करोड़ 90 लाख मकानों की कमी है और बेघर लोगों में से 96 प्रतिशत एेसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वर्ग के हैं। वर्ष 2030 तक मकानों की संख्या दोगुनी कम होकर तीन करोड़ 80 लाख होने का अनुमान है।

उपराष्ट्रपति ने शहरी इलाकों में सस्ते दर पर जमीन उपलब्ध न होने तथा जरूरी मंजूरी न मिलने की समस्या को दूर करने की जरूरत बतायी । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सस्ते मकानों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये हैं लेकिन निजी क्षेत्र आैर रियल इस्टेट की कंपनियों को इसमें ज्यादा भूमिका निभानी चाहिए।

रियल इस्टेट क्षेत्र की कंपनियों को कामगारों के परिजनों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित न हों। मकानों की कमी दूर करने के लिए आवास ऋण को बढ़ाने की जरूरत बताते हुए श्री नायडू ने कहा कि अभी यह सकल घरेलू उत्पाद का मात्र सात प्रतिशत है जो एशियाई देशों के औसत 20 प्रतिशत से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अभी आवास के लिए सलाना औसतन एक लाख करोड़ का निवेश हो रहा है जबकि अगले छह वर्षाें में इसके लिए 18 से 20 लाख करोड रूपये की जरूरत होगी। श्री नायडू ने कहा कि रियल इस्टेट क्षेत्र में किये गये सुधाराें के कारण वर्ष 2017 की पहली छमाहीं में 25करोड़ 70 लाख डालर का प्रत्यक्ष विदेश निवेश आया जो 2016 की समान अवधि के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है । इस दौरान इस क्षेत्र में करीब पांच अरब डालर निवेश किये जा चुके हैं।

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