नसीराबाद को मात देता बिजयनगर का कचौरा

बिजयनगर। रेल्वे फाटक के नीचे श्मसान रोड़ पर स्थित प्रतिष्ठान कैलाश कचौरा पर बनने वाले कचोरे ने खासी धूम मचा रखी है यहा बनने वाला कचोरा टेस्ट व क्वालिटी में नसीराबाद के कचोरे को भी मात दे रहा है। इसी का परिणाम है कि जयपुर, दिल्ली, बोम्बे, मद्रास, हैदराबाद सहित विदेशों तक यह कचोरा जा रहा है। दुकानदार अशोक कुमावत के मुताबिक उनके पिता स्व. कैलाशचन्द्र कुमावत ने 50 वर्ष पूर्व स्थानीय रेल्वे स्टेशन के बाहर ठेले पर कडाही लगाकर कचौरा बेचना शुरू किया था और देखते ही देखते कचौरा लोगों की जुबां पर चढ़ गया। जब अशोक जवान हुए तो वे पिता के सहयोग के लिए ठेले पर जाने लगे और रफ्ता-रफ्ता पिता से कचौरा बनाने की विधि सीख ली जो आज उनकी आजीविका का मुख्य साधन हैं। ठेला खड़ा करने को लेकर आए दिन होने वाले विवाद से बचने के लिए अशोक ने वर्ष 2006 में फाटक के पास स्थित दुकान खरीद ली जहां वर्तमान में वे अपना कचौरा व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं।

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