खेल और खिलाडिय़ों को तरसा मैदान

कस्बे के सबसे बड़े नारायण स्कूल के खेल मैदान की चारदिवारी को समाजकंटकों ने जगह-जगह से तोड़ा, बिजयनगर स्थित सबसे बड़े मैदान का हाल बेहाल है। झाड़-झंखाड़, गंदगी के जगह-जगह ढेरों ने मैदान का स्वरूप बिगाड़ दिया है। गोया यह कि राजकीय नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान में मैदान जैसा अब कुछ नहीं है। लोग यहां शौच तक करते हैं। जिम्मेदार मौन है, आसपास के लोग लाचार हैं, जनप्रतिनिधि नजर फेरे हुए हैं और इस सब के बीच नौनिहाल विवश है, आखिर खेलें तो कहां खेलें?

खारीतट सन्देश ने उठाया था मुद्दा
खारीतट सन्देश सामाचार पत्र में 1 फरवरी के अंक में ‘टे्रचिंग ग्राउण्ड या खेल मैदान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद नगरपालिका प्रशासन हरकत में आया और उसने जेसीबी की सहायता से जगह-जगह बबूल के झाड़-झंखाड़ हटाए। इससे क्षेत्र में खलबली मच गई, लेकिन कुछ दिन गुजरने के बाद अब फिर पहले की तरह ही लोग मैदान में शौच के लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं मैदान में टेम्पू भर-भरकर इधर-उधर का कचरा लाकर डाला जा रहा है। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन स्तब्ध कर देने वाली चुप्पी साधे बैठा है।

बिजयनगर। ग्रीष्म अवकाश घोषित होने में कुछ ही दिन शेष बचे हैं। स्कूलों की कई परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं और बच्चे इन दिनों खेलकूद में जुट गए हैं। ऐसे में अभिभावकों व बच्चों को सर्वाधिक कमी खल रही है, वह है खेल मैदान की। कस्बे के बीचोबीच 46 बीघा क्षेत्रफल की भूमि पर स्थित राजकीय नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय का  खेल मैदान दुर्दशा का शिकार हो रहा है। जिम्मेदार आंखें मुंदे हुए हैं। खेल मैदान की दुर्दशा का आलम यह है कि यह बच्चों के खेलने लायक अब बचा ही नहीं है। या यूं कहें कि बिजयनगर में खेल भी अब बच्चों का खेल नहीं रहा।

समाजकंटकों ने खेल मैदान की चारदीवारी को चारों ओर से जगह-जगह तोड़ दिया है तथा इससे सटी कॉलोनियों के लोग बेरोकटोक इस मैदान में कूड़ा-करकट फेंक रहे हैं। इससे मैदान के एक तरफ का नजारा टे्रचिंग ग्राउण्ड जैसा हो गया है। कभी खेल और खिलाडिय़ों के शोरगुल में डूबा रहने वाला यह मैदान इन दिनोंं वीरान रहता है। कस्बे के खिलाड़ी मैदान की दुर्दशा के कारण इसमें खेलने का लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर में स्वच्छता भारत अभियान चलाकर देश को खुले में शौचमुक्त करने का बीड़ा उठा रखा है। इसमें राज्य की वसुन्धरा सरकार भी पूर्ण सहयोग दे रही हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है। नारायण स्कूल का खेल मैदान जो गंदगी और झाड़-झंखाड़ के कारण खेलने के लायक बचा ही नहीं। मैदान में जगह-जगह कांटे बिखरे हुए हैं। ऐसे में भला कोई खिलाड़ी कैसे खेल सकता है। अब इसे खेल मैदान नही टे्रचिंग ग्राउण्ड कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।


धनराज कावडिय़ा, राष्ट्रीय खिलाड़ी, बिजयनगर

अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा मैदान
कस्बे में सबसे बड़ा मैदान नारायण स्कूल का खेल मैदान ही है। यह मैदान ७०-८० के दशक में कभी खिलाडिय़ों के शोरगुल में डूबा रहता था। यहां अपनी प्रतिभा को निखार कर कई खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर बिजयनगर को गौरवान्वित कर चुके हैं, लेकिन आज स्कूल प्रशासन की उदासीनता व जनप्रतिनिधियों की बेरुखी के कारण यह मैदान अपनी दुर्दशा पर आंसु बहा रहा है। यहां जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि
इसकी चारदीवारी निर्माण को प्राथमिकता दें।


विश्वनाथ पाराशर, राज्य स्तरीय खिलाड़ी, बिजयनगर

अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे स्कूल प्रशासन-अरोड़ा
मैं नारायण स्कूल में सन् 1972 से 1986 तक शारीरिक शिक्षक के पद पर रहा। इस दौरान मैदान खेल और खिलाडिय़ों से रोजाना भरा नजर आता था। अब हालात यह हो गए हैं कि समाजकंटकों ने इसकी दीवार को चारों ओर जगह-जगह से तोड़ दिया है। आसपास की कॉलोनी के लोग बेरोकटोक इसमें कचरा फेंक रहे हैं। स्कूल प्रशासन को चाहिए कि वह मैदान के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे ताकि बिजयनगर की खेल प्रतिभाओं को पंख लग सके।


जयसिंह अरोड़ा, पूर्व वरिष्ठ शा.शि. व वॉलीबाल प्रशिक्षक, बिजयनगर

होगी कानूनी कार्यवाही
खेल मैदान में वर्षा के दिनों में पानी भर जाता है। इस समस्या के निवारण के लिए मैदान के किनारे नाला निर्माण के लिए साधारण सभा में बजट पारित करवाया जाएगा। जहां तक गंदगी का सवाल है तो इस सम्बंध में स्कूल प्रशासन ने हमसे कोई शिकायत नही की है। मैदान में यदि कोई व्यक्ति खुले में शौच करते पाया गया तो उनकी पकड़-धकड़ कर उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
कमलेश कुमार मीणा, ईओ, नगरपालिका, बिजयनगर

फिर भेजा जाएगा स्मरण पत्र
स्कूल की चारदीवारी जगह-जगह से टूटी हुई है यही सबसे बड़ी समस्या है। इसके निर्माण के लिए बजट स्वीकृत कराने के लिए मेरी ओर से भरसक प्रयत्न किए जा रहे हैं। जहां तक गंदगी का सवाल है इसके लिए हमने नगरपालिका प्रशासन को पत्र भेज रखा है। एक बार फिर स्मरण पत्र शीघ्र भेज दिया जाएगा।
सुनिलकुमार व्यास, प्रधानाचार्य, राजकीय ना.उ.मा.वि., बिजयनगर

ठहरा रहे एक-दूसरे को जिम्मेदार
यह बात शहर के खेल-प्रेमियों और खिलाडिय़ों को मन ही मन साल रही है। चाहे स्कूल प्रशासन हो या नगर पालिका प्रशासन दोनों संस्थाएं दुर्दशा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही है। इस बात को लेकर लोगों में रोष है।

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