ढोंग का नहीं, ढंग का जीवन जिएं

‘जादुई जीवन के गोल्डन रूट्स’ विषय पर बोले जैन मुनि सुरेशकुमार ‘हरनांवा’, मुख्य समारोह आज
बिजयनगर। जैन धर्म के चरम तीर्थंकर श्रमण भगवान महावीर की जन्म जयन्ती का त्रिदिवसीय कार्यक्रम श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा बिजयनगर के तत्वावधान में न्यूलाईट कॉलोनी स्थित तेरापंथ भवन में आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती शासन श्री मुनि सुरेशकुमार ‘हरनावा’ के सान्निध्य एवं मुनि सम्बोधकुमार के निर्देश में होगा।

तेरापंथ सभा की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार मुनिवृंद के सान्निध्य में गुरुवार को विज्ञान को महावीर की सौगात व शुक्रवार को प्रेज्ञा ध्यान से मोक्ष की यात्रा कार्यक्रम होंगे। उपरोक्त कार्यक्रम शाम 7.45 से 9.15 बजे तक आयोजित होंगे। भगवान महावीर जयन्ती का मुख्य समारोह गुरुवार को सुबह 9.15 बजे होगा। समारोह के मुख्य अतिथि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मेघना जैन, अध्यक्षता बिजयनगर पालिकाध्यक्ष सचिन सांखला तथा विशिष्ट अतिथि गुलाबपुरा पालिका उपाध्यक्ष प्रदीप रांका होंगे।

जीना उसी का है जो अंगारा बन कर जिएं, धुआं बनकर जीएं तो क्या जिएं। जीना भी एक कला है। अक्सर लोगो को यह कहते हुए सुनते हैं कि जीना क्या है बस जिन्दगी कांट रहे हैं, हम जिन्दगी को क्या काटेंगे जिंदगी धीरे-धीरे हमें काट देती है। यह बात आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती शासन श्री मुनि श्री सुरेश कुमार हरनावां ने ‘जादुई जीवन के गोल्डन रूट्स’ विषय पर बोल रहे थे।

डिग्रियों के फोल्डर के साथ घूमने वालों से वे बेहतर हैं जिन्होंने स्कूल की चौखट भी नहीं देखी, मगर जीवन जीना सीख लिया। जिन्दगी में ऊंचाई हो ना हो गहराई जरूर हो। वे न्यू लाइट कॉलोनी स्थित तेरापंथ भवन में खचाखच भरे सभागार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ढोंग का नहीं ढंग का जीवन जिएं। जीवन का उद्देश्य है कि उद्देश्य भरा जीवन हो।

मुनि श्री सम्बोध कुमार जी ने कहा कि जन्म लिया है तो सिर्फ सांस मत लीजिये जीने का शौक भी रखें। श्मशान ऐसे लोगों की राख से भरा है जो समझते हैं उनके बिना दुनिया नहीं चलती है। दुनिया के साइंटिस्ट ढूंढ रहे हैं मंगल ग्रह में जीवन है या नहीं मगर आदमी ये ढूंढ नहीं रहा कि जीवन में मंगल है या नहीं। हिम्मत से हारना मगर हिम्मत मत हारना, सब कुछ, कुछ नहीं से ही शुरू होता है।

हम ऐसा जीवन जीने की कोशिश करें कि जब हमारी मौत की घड़ी आ पहुंचे तो दफनाने वाला अफसोस करें। जिन्दगी में उतार-चढ़ाव का आना जरूरी है। क्योंकि ईसीजी में सीधी लाइन का मतलब सिर्फ मौत होता है। उन्होंने कहा जिन्दगी में विप्पति का आना पार्ट ऑफ लाइफ है, उन्हें मुस्कुराते हुए जीना ही आर्ट ऑफ लाइफ है।

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